ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है। वह लगातार भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन और वित्तपोषण दे रहा है। जम्मू संभाग में हुईं मुठभेड़ों में मारे गए सातों आतंकी पाकिस्तानी थे। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि पाकिस्तान सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को प्रायोजित व वित्तपोषित करने का काम जारी रखे हुए है। उसकी नापाक हरकतें बंद नहीं हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी यह समूह अप्रैल और मई 2025 से लगातार निगरानी में था। इन्हें ढेर करने के लिए सुरक्षाबलों ने दिन-रात एक कर दिया। तकनीकी सर्विलांस, ह्यूमन इंटेलिजेंस और जमीनी स्तर समन्वय के साथ की कार्रवाई से आखिर इस मॉड्यूल का सफाया करने में कामयाबी मिली है।
एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों का यह समूह पाकिस्तान स्थित आकाओं के सीधे संपर्क में था। हथियारों की आपूर्ति, सैटेलाइट फोन और संचार उपकरणों की उपलब्धता, नकद फंडिंग और स्थानीय स्तर पर रसद पहुंचाने की व्यवस्था सीमा पार से संचालित की जा रही थी। 12 हजार फीट की ऊंचाई वाले कठिन इलाकों में लंबे समय तक सक्रिय रहना बिना संगठित वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट के संभव भी नहीं था। इससे यह साफ हो गया है कि आतंकवाद केवल घुसपैठ तक सीमित नहीं बल्कि व्यवस्थित ढंग से पोषित किया जा रहा है।
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक इस मॉड्यूल का उद्देश्य क्षेत्र में अस्थिरता फैलाना, विकास गतिविधियों को बाधित करना और भय का माहौल बनाना था। ऑपरेशन के दौरान आतंकी सैफुल्लाह सहित सात पाकिस्तानी आतंकी मारे गए हैं। मारे गए आतंकियों की पहचान और बरामद सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें सीमा पार से लगातार दिशा-निर्देश और आर्थिक सहयोग मिल रहा था। इन्हें घुसपैठ से लेकर प्रशिक्षण तक पाकिस्तान से मिला था। आतंकियों के पास से विदेशी हथियार मिले हैं। ये वही हथियार हैं जो अमेरिका की सेना ने अफगानिस्तान में छोड़े थे। इनका इस्तेमाल अब पाकिस्तानी आतंकी कर रहे हैं।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.