Pandit Dhirendra Shastri in Pushkar: कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री का अजमेर और पुष्कर को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने कहा कि जो भी हिंदू अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने जाते हैं, उन्हें पुष्कर आकर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान भी करना चाहिए. शास्त्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हिंदुओं को पुष्कर की महिमा समझनी चाहिए और ब्रह्मा जी के तीर्थ से जुड़ाव बढ़ाना चाहिए.
अजमेर: कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री का अजेमर और पुष्कर को लेकर दिया गया बयान सुर्खियों में है. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि जो भी हिंदू अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने आते हैं उन्हें उन्होंने पुष्कर में पूर्वजों का पिंडदान करने की नसीहत दी है. इसके अलावा कथावाचक ने कहा- ‘जो अपने आप को ब्रह्मा की संतान नहीं मानते हैं तो समझ जाओ वो कोई और है. हम ज्यादा बोलेंगे तो मीडिया वाले छाप देंगे. इसलिए उतना ही बोलो जितने में दाल में काला नजर आ जाए. दाल में काला तक तो ठीक है, लेकिन काले में दाल ठीक नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा कि मैं समस्त हिंदुओं से आग्रह करेंगे कि वह पुष्कर की महिमा को जानें. भागवत और वामन पुराण में भी पुष्कर की चर्चा है. पुष्कर ऐसी जगह है जहां ब्रह्मा, शिव और सावित्री मैया भी विराजमान हैं.
उन्होंने कहा कि किसी और मजहब में जन्म हुआ होता तो बिना फोटो के पूजा कर रहे होते. सनातन धर्म महान है. इसमें महिलाओं को पूज्य माना जाता है. हमारे यहां राम सीता नहीं, बल्कि सीताराम कहा जाता. सनातन धर्म अदभुत है. अपने बाप को बाप कहो, दूसरों के बाप को क्यों बाप बना रहे हो. अजमेर के हिन्दूओं, अपने ग्रैंड फादर (ब्रह्मा) के यहां पुष्कर आया करो.
धीरेंद्र शास्त्री के ऐसा कहने के बाद खासकर लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. खासकर युवा पीढ़ी पूछते दिख रहे हैं कि पिंडदान की बात तो बिहार के बोधगया के बारे में सुनी थी, तो धीरेंद्र शास्त्री पुष्कर के बारे में ऐसा क्यों कह रहे हैं. आइए जानते हैं कि बाबा बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पुष्कर को लेकर ऐसी बात क्यों कर रहे हैं.
क्या वाकई पुष्कर में होता है पिंडदान?
राजस्थान के पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का मंदिर है. यह दुनिया में ब्रह्माजी का इकलौता मंदिर है. यहां आकर ब्रह्मसरोवर में डुबकी लगाने विशेष मान्यता है. इसके साथ ही यहां पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है. जयपुर से 150 किमी की दूरी पर बसे पुष्कर आकर मानसिक रूप से अनोखी शांति का अनुभव होता है. यहां ना केवल परमपिता ब्रह्मा के इकलौते मंदिर के दर्शन का सौभाग्य मिलता है, बल्कि दूर तक फैले पवित्र ब्रह्मा सरोवर के दर्शन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
दुनिया भर से लोग यहां स्नान करके पुण्य कमाने ही नहीं, बल्कि अपने पितरों की शांति का श्रद्धा भी करने आते हैं. पौराणिक मान्यताओं में पुष्कर को मृत्यु लोक के सबसे बड़े पवित्र तीर्थ में से एक माना गया है. यही करण है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु ब्रह्मा सरोवर के किनारे अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रताप के लिए विधि विधान से पिंडदान और तर्पण दोनों करते हैं.
केवल पुष्कर में क्यों है ब्रह्माजी का इकलौते मंदिर? पुष्कर में 500 से अधिक मंदिर हैं, जिसमें 80 बड़े और बाकी सभी छोटे मंदिर हैं. यहां के कई पुराने मंदिरों को औरंगज़ेब के शासनकाल में लूटा गया. बाद में फिर से इन मंदिरों का नवनिर्माण कराया गया. इनमें सबसे महत्वपूर्ण मंदिर ब्रह्मा मंदिर है. यह संरचना 14वीं शताब्दी की है. मंदिर को ब्रह्मा के यज्ञ अनुष्ठान के बाद ऋषि विश्वामित्र की ओर से बनाया गया था. ब्रह्मा ने स्वयं अपने मंदिर के लिए स्थान का चुनाव किया था. आठवीं शताब्दी के हिंदू दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोधार करवाया था. मंदिर की वर्तमान संरचना मध्य युगीन रतलाम के महाराजा जगत राज की है. मां सरस्वती (सावित्री) के श्राप के कारण पुष्कर में ब्रह्मा जी का एक मात्र मंदिर है. पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्माजी ने सावित्री के समय पर न पहुंचने के कारण एक स्थानीय कन्या गायत्री के साथ यज्ञ संपन्न कर लिया था. इससे क्रोधित होकर सावित्री ने उन्हें पृथ्वी पर पूजा न जाने का श्राप दिया, लेकिन बाद में इसे केवल पुष्कर तक सीमित कर दिया.
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Abhishek Kumarअभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें