चंडीगढ़ में लंबे समय से डेपुटेशन पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासन ने सख्ती की तैयारी कर ली है। मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने सात साल से अधिक समय से डेपुटेशन पर तैनात अफसरों और कर्मचारियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तलब किया है।
इसमें डॉक्टरों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कार्यप्रणाली, दक्षता और प्रदर्शन का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। जिनकी परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं पाई जाएगी उन्हें उनके मूल काडर में वापस भेजा जाएगा।
मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि डेपुटेशन कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक जरूरतों को अस्थायी तौर पर पूरा करना होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब डेपुटेशन पर आए अधिकारियों और कर्मचारियों की हर छह महीने में परफॉर्मेंस समीक्षा की जाएगी।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विभागों में कार्यरत स्टाफ जिम्मेदारी और कार्यकुशलता के साथ सेवाएं दे रहा है या नहीं। चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन समेत कई अहम विभागों में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से डेपुटेशन पर कार्यरत हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा डेपुटेशन पर तैनात हैं अफसर
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से सबसे ज्यादा डेपुटेशन पर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं। शिक्षा विभाग की बात करें तो इस समय करीब 700 से 850 शिक्षक डेपुटेशन पर काम कर रहे हैं। इनमें अधिकतर शिक्षक पंजाब और हरियाणा से आए हुए हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर बने रहने के कारण विभागीय कार्यप्रणाली और यूटी कैडर के पदों पर तैनाती या भर्ती नहीं किये जाने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। वर्तमान में पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर करीब 122 से अधिक डॉक्टर और अधिकारी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि यूटी कैडर के केवल पांच से छह डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यूटी कैडर के डॉक्टरों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
जवाबदेही तय करेगा प्रशासन
मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि इस परफोर्मेंस रिपोर्ट को तलब करने के पीछे का उद्देश्य यह है कि जो अधिकारी या कर्मचारी डेपुटेशन पर आए हैं उनके काम का मूल्यांकन हो सके और उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उसके प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि विभागों में कार्य में भी सुधार होगा। नियमित मूल्यांकन से योग्य और मेहनती अधिकारियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। वहीं लापरवाह और कमजोर प्रदर्शन करने वालों को वापस उनके मूल काडर में भेजा जाएगा।
गृहमंत्री के समक्ष भी डेपुटेशन और कैडर को लेकर उठा था मुद्दा
नॉर्दन जोनल काउंसिल की बैठक में बीते दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने डेपुटेशन व कैडर का मुद्दा उठाया था। सीएम मान ने कहा था कि चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन 60-40 के अनुपात में अधिकारियों व कर्मचारियों की डेपुटेशन पर तैनाती की जाती है। लेकिन प्रशासन यूटी कैडर के अधिकारियों को इन पदों पर तैनात कर रहा है। अब प्रशासन ने डेपुटेशन पर आए अधिकारियों व कर्मचारियों की रिपोर्ट तलब कर लंबे समय से टिके अधिकारियों का मूल्यांकन शुरू कर दिया है।
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