निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्देश दिए कि इलेक्ट्रिशियन शाखा के विद्यार्थियों से ही विद्युत मरम्मत कार्य कराया जाएं, ताकि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण भी मिल सके। उन्होंने जर्जर भवनों और अनुपयोगी हिस्सों को डिस्मेंटल कराने तथा जीर्णोद्धार योग्य कार्यों का स्टीमेट तैयार कर शासन को शीघ्र भेजने के निर्देश भी दिए।
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हालांकि मंत्री ने कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया और प्लेसमेंट व्यवस्था पर संतोष जताया, लेकिन निरीक्षण में उजागर हुई बदहाली ने तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। जब लेबोरेटरी और संसाधन कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा किस आधार पर दी जा रही है। यह सवाल अब कॉलेज प्रशासन के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। औचक निरीक्षण के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि शासन स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज वास्तव में तकनीकी शिक्षा का मजबूत केंद्र बन सके, न कि केवल कागजों में चलने वाली संस्था।
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