महासती भंवर कुंवरजी मसा का मंगलवार सुबह 8.55 बजे पाली में 96 वर्ष की आयु में संथारा सहित पंडित मरणा द्वारा देवलोकगमन हो गया। साध्वीजी का रायपुर से पुराना नाता रहा है। यहां उनके कई भक्त हैं और यहां उन्होंने दो चातुर्मास किए। रायपुर में उनकी गुणानुवाद सभा हुई, इसमें भक्तों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि आज हमारी आंखें नम हैं और हृदय भारी है। जिन्होंने हमें संयम की राह दिखाई और हमारी आत्मा को परमात्मा से जोड़ना सिखाया, ऐसी पूज्य गुरुणी आज भले ही देह रूप में हमारे बीच न हों, पर उनके विचार और उपदेश सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनका देवलोक गमन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि एक युग का अंत है। गुरुणी का जीवन एक खुली किताब की तरह था, जिसके हर पन्ने पर त्याग, तपस्या और साधना की गाथा लिखी थी। उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे। उनकी दीक्षा संवत 2004, आसोज सुदी 10 (सन् 1947) को मात्र 17 वर्ष की अल्प आयु में नागौर, राजस्थान में हुई थी। डूंगरगढ़ में जन्म लेकर साध्वीजी को अपने पिता जेठमल पुगलिया व माता प्रेमवती से उच्च संस्कार प्राप्त हुए। उनका जीवन करीब 79 वर्षों की लंबी दीक्षा पर्याय से आलोकित रहा, जो आपकी अडिग श्रद्धा का प्रतीक है। गुरुणी ने हमें सिखाया कि जीवन की शांति भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि परिग्रह से विरक्ति में है। उन्होंने सदैव इस बात पर जोर दिया कि अहिंसा और संयम ही जीवन के आभूषण हैं। रायपुर निवासी अत्यन्त सौभाग्यशाली हैं कि हमें गुरुणी मसा के 2 चातुर्मास (1963 व 1989) में लाभ प्राप्त हुआ।
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