Capsicum Farming Benefits: बिहार के छपरा के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर दिखाई दे रहा है. नई तकनीक और आधुनिक तरीकों को अपनाकर किसान न सिर्फ अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं. आज हम आपको सारण जिले के एक ऐसे युवा किसान की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने खास फसल की खेती कर अपनी पहचान बनाई है.
सारण जिले के मांझी प्रखंड अंतर्गत मांझी निवासी अमित सिंह अपनी जमीन पर पोली हाउस के माध्यम से खास किस्म की शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं. यह शिमला मिर्च बाजार में सामान्य मिर्च की तुलना में कहीं अधिक कीमत पर बिकती है. अमित सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर पोली हाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू की है.

वे पूरी तरह जैविक विधि से शिमला मिर्च का उत्पादन करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है. अमित सिंह सिर्फ शिमला मिर्च तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने केले की बागवानी भी शुरू की है. उनकी खेती आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

शिमला मिर्च की खेती से पहले खेत या पोली हाउस की अच्छी तरह से तैयारी करना जरूरी होता है. यदि किसान जैविक खेती करना चाहते हैं, तो सबसे पहले जैविक खाद डालकर क्यारियां तैयार करनी होती हैं. इस खास किस्म की शिमला मिर्च का बीज छपरा में आसानी से उपलब्ध नहीं होता, इसलिए किसानों को पहले से बीज के लिए ऑर्डर करना पड़ता है. यह बीज दूसरे राज्यों से मंगाया जाता है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से भी खरीदा जा सकता है.
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शिमला मिर्च में लगभग एक महीने के भीतर फलन शुरू हो जाता है. बीज बोने के बाद समय-समय पर सिंचाई और आवश्यक दवाओं का छिड़काव करना बेहद जरूरी होता है. सही देखभाल के बाद पौधों में बहुत जल्दी फलन शुरू हो जाता है. सारण की मिट्टी में इसकी उपज काफी बेहतर देखी जा रही है. एक पौधे से औसतन 5 किलो या उससे अधिक शिमला मिर्च का उत्पादन होता है. खास बात यह है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजार नहीं जाना पड़ता. व्यापारी सीधे खेत तक पहुंचकर मिर्च की खरीदारी कर लेते हैं.

यह शिमला मिर्च अन्य सामान्य मिर्च की तुलना में अधिक दाम पर बिकती है. आमतौर पर इसका भाव 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर बना रहता है. किसान एक दिन छोड़कर नियमित रूप से मिर्च की तुड़ाई कर बाजार में भेजते हैं. लोकल 18 से बातचीत में बीज बिहारी राम ने बताया कि सारण की धरती पर शिमला मिर्च की फसल काफी अच्छी हो रही है. उन्होंने बताया कि लगभग एक महीने में फलन शुरू हो जाता है और किसान इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. हम लोग पिछले तीन-चार वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं और हर साल बेहतर उत्पादन मिला है. एक पौधे से करीब 5 किलो शिमला मिर्च की तुड़ाई की जाती है, जो अन्य मिर्च की तुलना में महंगे दाम पर बिकती है.

अमित सिंह ने बताया कि किसान लगातार तीन महीने तक शिमला मिर्च की तुड़ाई कर सकते हैं. इसका बीज किसान खुद भी तैयार कर सकते हैं या ऑनलाइन खरीदकर खेत में लगा सकते हैं. यदि किसान इस फसल की खेती करते हैं, तो उन्हें अच्छी आमदनी हो सकती है. शिमला मिर्च को पोली हाउस के बाहर भी लगाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना जरूरी है. बिना विशेषज्ञ सलाह के पोली हाउस के बाहर खेती करने पर नुकसान की आशंका बनी रहती है.
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