नागौर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-02 की न्यायाधीश कुमकुम सिंह ने बुधवार को वर्ष 2013 के बहुचर्चित अपहरण और जानलेवा हमले के मामले में अहम फैसला सुनाया। न्यायालय ने सरपंच पति पुखराज काला सहित सभी छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए गंभीर धाराओं में सजा सुनाई है।
न्यायालय ने दोषियों को धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत 10-10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना, जबकि धारा 365 (अपहरण) के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
2013 में मेले से हुआ था अपहरण
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 19 सितंबर 2013 की है। परिवादी नरपतराम ने कुचेरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने भाई श्रवणराम और अन्य साथियों के साथ ग्राम ग्वालू में संतोष नाथजी के मेले में गया था। रात करीब 12:45 बजे पुरानी रंजिश के चलते पुखराज काला, सुरेश, गणपत, कैलाश, रामनरेश और एक अन्य सुरेश दो गाड़ियों में हथियारों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोपियों ने मेले में सरेआम मारपीट की और श्रवणराम का अपहरण कर उसे कैम्पर गाड़ी में डालकर खेतों की ओर ले गए।
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मरा समझकर सूनसान जगह फेंका
परिवादी ने बताया कि उन्होंने मोटर साइकिल से आरोपियों का पीछा किया लेकिन आरोपी करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ले जाकर श्रवणराम के साथ बेरहमी से मारपीट करने लगे। जब उन्हें लगा कि पुलिस या ग्रामीण पीछे आ सकते हैं, तो वे उसे दोबारा गाड़ी में डालकर आगे ले गए और मरा हुआ समझकर एक सूनसान स्थान पर फेंककर फरार हो गए।
मजबूत पैरवी, 21 गवाह
अपर लोक अभियोजक सुभाषचंद्र चौधरी ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में मजबूत पैरवी की गई। न्यायालय में 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, 67 दस्तावेजी साक्ष्य और 5 आर्टिकल प्रस्तुत किए गए, जिसके आधार पर आरोप सिद्ध हुए।
सजा पाने वालों में पुखराज पुत्र भंवरलाल काला (सरपंच पति, बलाया), सुरेश पुत्र भंवरलाल काला (बलाया), गणपतराम पुत्र रामदेव काला (बलाया), रामनरेश पुत्र सीताराम काला (बलाया), सुरेश पुत्र रामदयाल, कैलाश पुत्र प्रेमराम (अमंडा की ढाणी) शामिल हैं।
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