बैतूल में जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों के बिजली बिलों में ₹40 लाख से अधिक के गबन के मामले में आज (सोमवार) बैतूल जनपद के एक कर्मचारी समेत दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने कंप्यूटर ऑपरेटर छत्रपाल मर्सकोले और धर्मेंद्र वरकड़े के खि
यह पूरा मामला जनपद पंचायत बैतूल में जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों के विद्युत बिल भुगतान से संबंधित है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर छत्रपाल मर्सकोले ने IFMIS पोर्टल पर डीडीओ लॉगिन का दुरुपयोग किया।
ऑपरेटर ने फर्जी वेंडर बनाए और उनके माध्यम से विद्युत विभाग के नाम पर राशि निजी बैंक खातों में स्थानांतरित की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई मामलों में दोहरे भुगतान किए गए एक बार वास्तविक विद्युत विभाग के खाते में और दूसरी बार इन फर्जी खातों में।
जांच में आरोपी ने गलती स्वीकारी बैंक खातों की पुष्टि से पता चला कि वे विद्युत विभाग से संबंधित नहीं थे, बल्कि स्थानीय व्यक्तियों के थे। इनमें से कुछ खातों में आरोपी ऑपरेटर द्वारा यूपीआई के माध्यम से भी राशि ट्रांसफर की गई थी।
प्रशासनिक जांच में आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद जनपद पंचायत सीईओ शिवानी राय ने रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन को भेजी। जांच में कुल ₹40,04,067 के गबन की पुष्टि हुई, जिसमें से ₹5.24 लाख सरकारी खाते में वापस जमा कराए जा चुके हैं।
इसके पहले घोटाले सामने आने पर दो माह पहले सीईओ जिला पंचायत ने छत्रपाल मर्सकोले (कंप्यूटर ऑपरेटर), नितेन्द्र पांडे (सहायक ग्रेड-3) और वर्षा कमाविसदार (सहायक ग्रेड-2) को निलंबित किया गया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि प्रकरण की जांच जारी है और इसमें संलिप्त अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। उन्होंने कहा कि शासकीय धन जनता की अमानत है और इसके दुरुपयोग में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
जांच अधिकारी बसंत आहके ने बताया कि अभी मुख्य आरोपी के साथ दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में अन्य आरोपियों की संलिप्तता पाए जाने पर नाम जोड़े जाएंगे।
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