छत्तीसगढ़ में चल रही मतदाता सूची की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया अब सियासी बहस का मुद्दा बन गई है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम बिना जानकारी और बिना सुनवाई के मतदाता सूची से हटा दि
पार्टी का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सीधा खिलवाड़ है। इसके अलावा समय-सीमा 6 महीना बढ़ाने की मांग की गई है।
रायपुर में हुई प्रेसवार्ता में आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष घनश्याम चंद्राकर ने बताया कि राज्य में 27 लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। सालों से मतदान कर रहे लोगों के नाम अचानक कैसे गायब हो गए और उन्हें इसकी कोई सूचना तक क्यों नहीं दी गई।
SIR की समय-सीमा पर सवाल
पार्टी के कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने SIR की समय-सीमा पर कहा कि 7 नवंबर से शुरू हुई यह प्रक्रिया केवल 45 दिनों तक चली, जबकि पहले ऐसे अभियानों में कई महीनों का समय दिया जाता रहा है। प्रदेशभर से 2 लाख 74 हजार से ज्यादा लोगों ने दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है, जो यह दिखाता है कि बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए थे। उनका कहना था कि दावा-आपत्ति और सुनवाई के लिए तय किया गया समय जमीनी हालात के हिसाब से बेहद कम है।
घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं हुआ
आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव संतोष कुशवाहा ने BLO सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर कहा कि कई इलाकों में घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं हुआ, लेकिन दस्तावेजों में इसे पूरा दिखा दिया गया। छत्तीसगढ़ के आदिवासी, दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में इतनी कम अवधि में सही सत्यापन संभव ही नहीं है।
डिजिटल प्रक्रिया ने ग्रामीण और बुजुर्ग मतदाताओं को प्रभावित किया
प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने कहा कि ऑनलाइन फॉर्म, OTP और ऐप आधारित सिस्टम ने गरीब, बुजुर्ग और ग्रामीण मतदाताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। कई जगह आधार को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही, जिससे लोगों में नाम कटने का डर बना रहा। उन्होंने बाहरी राज्यों के नाम जुड़ने और स्थानीय नागरिकों के नाम हटने की शिकायतों का भी जिक्र किया।
AAP ने तत्काल रोक और सुधार की मांग की
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि मौजूदा SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और बिना कारण हटाए गए नामों को अस्थायी रूप से बहाल किया जाए। पार्टी ने दावा-आपत्ति, सुनवाई और वेरिफिकेशन की समय-सीमा कम से कम 6 महीने तक बढ़ाने की मांग की है।
प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की बात
साथ ही, पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से एक भी पात्र नागरिक का नाम हटना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.