मंडला स्थित कान्हा नेशनल पार्क से बारहसिंगा संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शनिवार सुबह विशेष रूप से तैयार वाहन से 12 बारहसिंगा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किए गए। इनमें 4 अवयस्क और 8 मादा बारहसिंगा शामिल हैं। यह दल लगभग 6 घंटे की सुरक्षित यात्रा के बाद सतपुड़ा पहुंचा। जहां इन्हें पूर्व निर्धारित क्षेत्र में छोड़ा गया।
हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक
यह कदम कान्हा से सतपुड़ा में बारहसिंगा आबादी को मजबूत करने की निरंतर चल रही योजना का हिस्सा है। इससे पहले भी कान्हा नेशनल पार्क से 115 बारहसिंगा सतपुड़ा भेजे जा चुके हैं। हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा विश्व की अति संकटग्रस्त प्रजातियों में गिने जाते हैं। एक समय ऐसा भी था जब यह प्रजाति केवल कान्हा के घास के मैदानों तक ही सीमित रह गई थी।
1970 में महज 66 रह गए थे बारहसिंगा
1970 के दशक में हुई गणना के अनुसार कान्हा में बारहसिंगा की संख्या घटकर मात्र 66 रह गई थी। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी थी। इसके बाद वन विभाग ने सुनियोजित संरक्षण उपायों पर काम शुरू किया। वन ग्रामों का विस्थापन कर खाली हुई भूमि को घास के मैदानों में बदला गया। जल स्रोतों के विकास के लिए तालाब और एनीकट बनाए गए। अवैध शिकार पर सख्ती, नियमित निगरानी और आवास सुधार के कारण बारहसिंगा की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती गई।
आबादी बढ़ाने के लिए किया जा रहा ट्रांस-लोकेशन
इन प्रयासों का ही परिणाम है कि आज कान्हा नेशनल पार्क में बारहसिंगा की आबादी 1000 के करीब पहुंच चुकी है। प्रजाति को किसी एक क्षेत्र तक सीमित रखने से भविष्य में विलुप्ति का खतरा बना रहता है, इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में एक व्यापक कार्य योजना तैयार की गई। इसके तहत कान्हा से अन्य सुरक्षित क्षेत्रों में बारहसिंगा का ट्रांस-लोकेशन शुरू किया गया।
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अब तक यहां किए गए स्थानांतरित
अब तक कान्हा से बारहसिंगा को बांधवगढ़, सतपुड़ा और वन विहार जैसे संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा चुका है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस प्रजाति को बसाने की प्रक्रिया वर्ष 2021 से चल रही है। मार्च 2023 में 19 बारहसिंगा और मई 2023 में 18 बारहसिंगा वहां भेजे गए थे। इस तरह बांधवगढ़ में स्थानांतरित बारहसिंगा की कुल संख्या 48 हो चुकी है। इसके अलावा करीब 7 बारहसिंगा वन विहार भी भेजे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रांस-लोकेशन कार्यक्रम न केवल बारहसिंगा के संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि मध्यप्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्व में जैव विविधता को भी और अधिक सशक्त बनाएगा।
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