प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि अवैध शराब की बिक्री के कारण गांव में आए दिन विवाद, घरेलू कलह और आर्थिक समस्याएं बढ़ रही हैं। कई परिवारों की स्थिति खराब हो चुकी है। महिलाओं का कहना था कि उन्होंने पहले भी मौखिक रूप से शिकायत की थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। ग्रामीणों ने मांग की कि अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और इस धंधे पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन के प्रतिनिधि एवं विधायक मुकेश टंडन भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं के आंदोलन में शामिल होकर उनकी बात सुनी और आश्वासन दिया कि अवैध शराब का कारोबार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव का सामाजिक वातावरण सुरक्षित और स्वस्थ रहना चाहिए, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार में विधायक स्वयं मौजूद हैं, तब उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की आवश्यकता क्यों पड़ी। यदि समय रहते प्रशासन सक्रियता दिखाता तो ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ता। लोगों का मानना है कि यह मामला प्रशासन की सुस्ती और निगरानी तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांव में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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