Wheat Pest Control Tips: करौली जिले में गेहूं की फसल पकने लगी है, लेकिन किसानों की मेहनत पर ओरिएंटल आर्मीवर्म कीट खतरा बनकर मंडरा रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कीट शाम 7 से रात 10 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. कृषि विभाग ने किसानों को समय-समय पर फसल की निगरानी करने, लार्वा और अंडों को नष्ट करने और लाइट ट्रैप या अलाव जलाने जैसी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है.
करौली जिले में गेहूं की फसल पकने की ओर बढ़ रही है, लेकिन किसानों की मेहनत को खतरा मंडरा रहा है. ओरिएंटल आर्मीवर्म नामक खतरनाक कीट गेहूं की फसल के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इस कीट के प्रकोप से फसल पर बड़े पैमाने पर असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. राजस्थान के पड़ोसी मध्यप्रदेश में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर बचाव के उपाय अपनाने की एडवाइजरी जारी की है. किसान फसल की निगरानी और कीट नियंत्रण उपाय अपनाएं.

इसके प्रकोप से करौली और आसपास के इलाकों के गेहूं किसानों को सतर्क रहने की आवश्यकता है. विशेषज्ञों के अनुसार मौसम और फसल की स्थिति अनुकूल होने पर ओरिएंटल आर्मीवर्म कीट तेजी से फैल सकता है. यह कीट फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किसानों की मेहनत और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. कृषि विभाग ने किसानों को समय-समय पर फसल की निगरानी करने और कीट नियंत्रण के उचित उपाय अपनाने की सलाह दी है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ओरिएंटल आर्मीवर्म दिन में कम और रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है. यह खासकर शाम 7 बजे से रात 10 बजे के बीच गेहूं की फसल पर हमला करता है. कई बार किसान सुबह खेत में पहुंचते हैं तो फसल पहले ही काफी नुकसान झेल चुकी होती है. यह कीट एक खेत से दूसरे खेत में तेजी से फैलता है और कुछ ही समय में पूरे खेत को चट कर सकता है. किसानों को समय-समय पर निगरानी और बचाव के उपाय करने की सलाह दी गई है.
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ओरिएंटल आर्मीवर्म के विकसित लार्वा लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इनका रंग हल्के भूरे से लेकर गहरे काले या मखमली काले तक हो सकता है. इनके शरीर पर गहरी भूरी धारियां और हल्के बाल स्पष्ट दिखाई देते हैं. यह कीट गेहूं के पौधे की जड़, तना और पत्तियों को एक साथ नुकसान पहुंचाता है, जिससे फसल पर गंभीर असर पड़ता है. किसानों को समय-समय पर फसल की निगरानी करने और कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है.

कृषि विभाग और विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी है. रात के समय, खासकर शाम 7 से रात 10 बजे के बीच, खेतों में लाइट ट्रैप या अलाव जलाने से कीट आकर्षित होकर नष्ट हो सकते हैं. खेत में दिखाई देने वाले अंडों के समूह और लार्वा को हाथ से इकट्ठा कर नष्ट करना भी जरूरी है. इन उपायों से ओरिएंटल आर्मीवर्म के फैलाव और फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में लकड़ी के टी-आकार के आसन लगाने की सलाह दी है, ताकि पक्षी बैठ सकें. ये पक्षी लार्वा को खाकर ओरिएंटल आर्मीवर्म के प्राकृतिक नियंत्रण में मदद करते हैं. इसके अलावा, खेत की नियमित निगरानी करना बेहद जरूरी है. शुरुआती लक्षण जैसे अंडों या लार्वा दिखाई देना, पत्तियों या तने पर नुकसान दिखना आदि तुरंत नोट करें. ऐसा करते ही नियंत्रण के उपाय जैसे हाथ से लार्वा निकालना, लाइट ट्रैप या अलाव जलाना अपनाएं. समय पर निगरानी और बचाव से फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है.
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