पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, होली पर्व के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च माह तक विभिन्न स्टेशनों से 308 फेरे चलाने की घोषणा की गई थी।
घोषणा के अनुसार 21 फरवरी से 02 मार्च, 2026 तक गोरखपुर, बनारस, दानापुर, समस्तीपुर, दरभंगा, भगत की कोठी (जोधपुर), हरिद्वार, रक्सौल, हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली सहित अन्य महत्वपूर्ण स्टेशनों के लिए 266 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं।
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इन ट्रेनों के माध्यम से महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों के बीच यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाया गया। विशेष रूप से 27 फरवरी से 02 मार्च, 2026 के बीच 27 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया। पश्चिम रेलवे द्वारा अपने संपूर्ण नेटवर्क पर यात्री आवागमन की लगातार और गहन निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
भीड़ प्रबंधन के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
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स्पेशल ट्रेनों के संबंध में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचने के लिए नियमित घोषणाएं की गईं।
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स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से ट्रेनों की अद्यतन जानकारी प्रदर्शित की गई।
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रेल कर्मचारियों द्वारा यात्रियों को समुचित मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की गई।
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यात्रियों को एटीवीएम और रेलवन ऐप के माध्यम से टिकट खरीदने के लिए प्रेरित किया गया।
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कतार में प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के लिए मोबाइल यूटीएस टिकटिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई।
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त्वरित टिकट निर्गमन के लिए अतिरिक्त बुकिंग काउंटर, एटीवीएम और हैंड-हेल्ड टिकटिंग टर्मिनल लगाए गए।
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प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए।
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होल्डिंग एरिया में पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
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स्पेशल ट्रेनों की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया।
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ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों द्वारा परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।
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प्रमुख स्टेशनों एवं ट्रेनों में पर्याप्त रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और टिकट जांच स्टाफ की तैनाती की गई।
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संवेदनशील स्टेशनों पर रीयल-टाइम निगरानी के लिए ड्रोन कैमरा और सीसीटीवी सर्विलांस का उपयोग किया गया।
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स्पेशल ट्रेनों के समयबद्ध संचालन के लिए सतत निगरानी रखी गई।
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यात्रियों के सुरक्षित चढ़ने और उतरने के लिए फुट ओवर ब्रिज, प्लेटफॉर्म, प्रवेश/निकास द्वार तथा ट्रेनों के भीतर आरपीएफ कर्मियों की तैनाती की गई।
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