अंगदान में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। कई भ्रांतिया होने के कारण लोग अंगदान से हिचकते हैं, जिसका नतीजा है कि कई मरीज अंगों के इंतजार में ही दम तोड़ देते हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक हरियाणा में 1984 मरीज अंगदान के इंतजार में हैं। इसमें 1042 किडनी ट्रांसप्लांट, 879 लिवर, 42 हार्ट, 20 लंग्स और एक मरीज पैनक्रियाज के इंतजार में हैं। यह सभी वेटिंग लिस्ट में हैं और अंगदान का इंतजार कर रहे हैं।
ट्रांसप्लांट से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि यह आंकड़ा तो आधिकारिक है। इससे कहीं ज्यादा लोगों के नाम आधिकारिक सूची में नहीं है। पीजीआई रोटो (क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन) की सलाहकार सरयू बताती हैं कि अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता की भारी कमी है। आईसीयू में मरीज के ब्रेन डेड के बाद जब परिजनों से अंगदान की सहमति मांगी जाती हैं तो वे इंकार कर देते हैं।
यदि पहले से उनमें जागरूकता हो तो दिक्कतें नहीं आती हैं। यमुनानगर व अंबाला के कई परिजनों ने अपने मरीजों के अंगदान दिए हैं, इससे एक नहीं कई मरीजों को नई जिंदगी मिली है। हरियाणा में 2020 से 2024 के बीच करीब 215 ऐसे मरीज हैं, जिनकी मृत्यु अंगदान के इंतजार में रह गई थी। वहीं, पड़ोसी राज्य में पंजाब में स्थिति बेहतर है। पंजाब में इन चार साल में सिर्फ पांच मरीजों की मौत हुई है। हालांकि पंजाब में भी 2652 मरीज भी अंगदान के इंतजार में हैं।