लुधियाना में जगराओं नगर कौंसिल एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कौंसिल दफ्तर परिसर में कथित तौर पर पेड़ काटकर न केवल पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन किया गया, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों की भी अवहेलना की गई। इस मामले में सबूत मिटान
मामले की जानकारी मिलते ही समाजसेवी और पर्यावरण प्रेमी सतपाल देहड़का ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर सवाल उठाया कि जब सरकारी दफ्तरों के भीतर ही पेड़ सुरक्षित नहीं हैं, तो सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे पेड़ों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
सतपाल देहड़का ने कहा कि पेड़ों की कटाई केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और हरित क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या नगर कौंसिल खुद को हाईकोर्ट से ऊपर समझती है?
उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूरे पंजाब में अदालत की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी पेड़ की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश मोहाली की एयरपोर्ट रोड पर लगभग 250 पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगली सुनवाई या विशेष अनुमति के बिना राज्य में कहीं भी पेड़ नहीं काटे जाएंगे।
देहड़का ने पूछा कि जब हाईकोर्ट के आदेश प्रभावी हैं, तो नगर कौंसिल जगराओं में पेड़ किसके आदेश पर काटे गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर इसे भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें तीन पेड़ काटे जाने की सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर केवल एक ही पेड़ पड़ा मिला। बाकी दो पेड़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। देहड़का ने आरोप लगाया कि दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय नगर कौंसिल अधिकारी उस स्थान पर मिट्टी डलवा रहे थे, ताकि सबूत मिटाकर मामले को दबाया जा सके।
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