बागेश्वर नगर के बाजारों में स्थानीय काश्तकारों की उगाई सब्जियों की खूब बिक्री हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने खेतों में सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन को स्थानीय बाजारों में बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। बाजारों में स्थानीय सब्जियों की आमद से बाहरी जिलों से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता कम हो रही है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में काश्तकारों ने सब्जी उत्पादन को अपनाकर जिले के सब्जी बाजार के स्वरूप को बदल दिया है। नगर के सब्जी बाजार में अब अधिकतर स्थानीय सब्जियां आने लगी हैं। लोग अब मैदानी जिलों से आने वाली सब्जियों की जगह जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित हो रही ताजी सब्जियों का उपयोग कर रहे हैं। कम दूरी से बाजार में पहुंच रही सब्जियां कम दाम में भी उपलब्ध हो रही हैं। स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि पहले हल्द्वानी मंडी से सब्जियां मंगानी पड़ती थी, जिसमें भारी- भरकम परिवहन भाड़ा चुकाना होता था। लेकिन अब जिले में उत्पादन होने से मैदानी क्षेत्रों से कम ही सब्जियां मंगानी पड़ रही हैं। स्थानीय सब्जियों की ग्राहक अधिक मांग करते हैं।
दुकानों में उपलब्ध स्थानीय सब्जियों के बाजार भाव
शामा क्षेत्र से आ रही हरी सब्जियां पालक, मेथी, लाई – 10 रुपये प्रति गड़्डी
फूलगोभी- 40 रुपये प्रति किलो
ब्रोकली- 60 रुपये प्रति किलो
मूली- 40 रुपये प्रति किलो
आलू- 15 रुपये प्रति किलो
लाल आलू- 20 रुपये प्रति किलो
टमाटर- 30 रुपये प्रति किलाे
मटर- 40 रुपये प्रति किलो
पत्तागोभी- 40 रुपये प्रति किलो
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सीजन के अनुसार विभिन्न प्रकार की सब्जियां आ रही हैं। मौसमी सब्जियों को अब हल्द्वानी से मंगानी की जरूरत नहीं पड़ती है। हमारे यहां अधिकांश उत्पाद शामा क्षेत्र के किसानों से मंगाए जाते हैं। बर्फबारी के बाद हरी सब्जियों की मांग बढ़ी है। ग्राहक भी स्थानीय उत्पादों को अधिक पसंद कर रहे हैं।-कुंवर कोरंगा, सब्जी विक्रेता
जिले में बीते चार-पांच वर्षों से सब्जियों का उत्पादन बढ़ा है। जिससे बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम हो रही है। हमारे यहां अधिकांश सब्जियों आरे क्षेत्र के किसानों से मंगाई जा रही हैं। स्थानीय सब्जियां ताजी होने के चलते उनकी मांग अधिक है।-हर्षित कठायत, सब्जी व्यापारी
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