खुली नालियां, पानी की टूटी टंकियां, क्षतिग्रस्त चाहरदीवारी और खेल के मैदान का अभाव, कुछ ऐसा हाल है जिला मुख्यालय से सटे मालतोली क्षेत्र में स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय का। यह विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, मगर सुविधाओं की कमी ने यहां पढ़ने वाले बच्चों को मानो चारदीवारी के भीतर कैद कर दिया है।
विद्यालय परिसर के नाम पर न तो कोई खेल मैदान है और न ही खुला आंगन। छात्र केवल भवन की छत पर बैठकर बाहरी दुनिया को निहारने को मजबूर हैं। वर्ष 2009 में बना यह विद्यालय आज तक उपेक्षा और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। स्थापना के बाद से अब तक यहां छात्रों की संख्या कभी भी 100 तक नहीं पहुंच पाई। आवासीय विद्यालय होने के बावजूद बच्चों ने करीब 17 वर्ष इन्हीं परिस्थितियों में बिता दिए हैं।
वर्तमान में विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक कुल 92 छात्र अध्ययनरत हैं। जिनमें छात्र और छात्राओं की संख्या लगभग समान है। शौचालयों की संख्या कम होने के साथ-साथ खुले नालों से दुर्गंध आती रहती है। खाद्य सामग्री जिस स्टोर रूम में रखी जाती है, वहां सीलन की समस्या है। बारिश के दिनों में नमी बढ़ने से सामग्री खराब होने का खतरा बना रहता है।
तीन शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त
भवन के भीतर रंग-रोगन और बनावट भी ऐसी है कि पूरा वातावरण उदास और निराशाजनक प्रतीत होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि वर्ष 2015-16 में स्वीकृत भूमि पर 45 करोड़ रुपये की लागत से नया परिसर जखोली ब्लॉक के सुमाड़ी क्षेत्र में निर्माणाधीन है।
विद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भी कमी है। वर्तमान में कुल 13 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें केवल 2 स्थायी शिक्षक हैं, शेष संविदा और अतिथि कर्मी हैं। तीन शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। कार्यालय स्टाफ के नाम पर केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर है, जो उपनल के माध्यम से तैनात है। सुरक्षा के लिए दो गार्ड थे, जिनमें से एक की हाल ही में आकस्मिक मृत्यु हो गई है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि भवन पूर्ण होते ही विद्यालय को नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावास की व्यवस्थाओं से जुड़ी है। नया परिसर सुमाड़ी-तिलवाड़ा में निर्माणाधीन है। नए भवन में शिक्षक और प्रधानाचार्य के क्वार्टर बन चुके हैं, जबकि शैक्षणिक भवन का निर्माण जारी है। छात्रावास की नींव रख दी गई है। – पूर्णिमा नवानी, प्रभारी आचार्य
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