उत्तराखंड बार काउंसिल के 23 सदस्यों के लिए 17 फरवरी को होने वाले चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस चुनाव के लिए राज्य के सभी जिला एवं सिविल न्यायालयों की बार एसोसिएशनों को मतदान केंद्र बनाया गया है। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने विभिन्न स्थानों पर तैनात एसडीएम और तहसीलदारों को मुख्य मतदान अधिकारी के रूप में सेवाएं देने की स्वीकृति प्रदान की है। बता दें कि बार काउंसिल के 23 पदों के लिए 104 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस चुनाव में करीब साढ़े चौदह हजार अधिवक्ता मतदान करेंगे।
बार काउंसिल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पूर्व न्यायाधीश रामऔतार सिंह की ओर से जारी सूचना के अनुसार मतदान प्रक्रिया के सुचारु संचालन के लिए जिलाधिकारी अपने संबंधित जिलों के मतदान केंद्रों पर मतदान अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। चुनाव से पूर्व मतदाता सूची और अन्य आवश्यक सामग्री जिला मुख्यालयों को भेज दी गई है। मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद सभी सीलबंद मतपत्र और महत्वपूर्ण दस्तावेज विशेष वाहकों के माध्यम से नैनीताल क्लब भेजे जाएंगे ताकि 20 फरवरी 2026 से मतगणना का कार्य प्रारंभ किया जा सके।
प्रत्येक 200 अधिवक्ताओं के लिए एक पृथक मतदान केंद्र और कम से कम एक चुनाव प्रकोष्ठ (वोटिंग कम्पार्टमेंट) अनिवार्य होगा। मतदान केंद्र के भीतर पर्याप्त रोशनी और लेखन कार्य के लिए उपयुक्त टेबल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
केंद्र में फोन वर्जित, बाहर जमा करना होगा
मतदाताओं की पहचान के लिए परिषद ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं को राज्य विधिज्ञ परिषद द्वारा जारी परिचय पत्र, पंजीकरण प्रमाणपत्र, सीओपी प्रमाणपत्र या बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी एआईबीई प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य होगा। मतदान प्रक्रिया के दौरान यदि कोई अधिवक्ता मतदान करने में अक्षम है तो वह मतदान अधिकारी की अनुमति लेकर अपना वोट डाल सकेगा। केंद्र के 50 गज के दायरे में किसी भी प्रकार के चुनाव प्रचार की अनुमति नहीं होगी। केंद्र के भीतर मोबाइल फोन ले जाना वर्जित है। इसे बाहर ही जमा करना होगा। यदि किसी मतदाता का मतपत्र खराब हो जाता है, तो उस पर निर्णय लेने का अधिकार केवल प्रभारी मतदान अधिकारी के पास होगा।
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