अमेरिका के राजदूत का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को चंडीगढ़ स्थित वेस्टर्न कमांड मुख्यालय पहुंचा। यहां उन्होंने आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट बिग्रेडियर मनोज कुमार कटियार से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। खास बात यह रही कि अमेरिका के राजदूत को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में वेस्टर्न कमांड की भूमिका के बारे में बताया गया। यह दौरा भारत-अमेरिका के बीच संभवत: रक्षा रणनीतियों एवं सौदों की एक खास कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
पुलवामा आतंकी हमले के बाद मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने अहम भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान द्वारा सीज फायर के लिए गिड़गिड़ाने के अलावा अमेरिका भी भारतीय सेना के इस ऑपरेशन पर विराम चाहता था। खैर, अपने अपने लक्ष्य साधने के बाद सेना ने इस ऑपरेशन को समाप्त किया था। लिहाजा सोमवार को आर्मी कमांडर द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी के बारे में अमेरिकन राजदूत के प्रतिनिधिमंडल को जानकारी देना खासी चर्चा का विषय रहा।
आतंकी हमले की पृष्ठभूमि से लेकर भारतीय सेना की ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई और इसमें वेस्टर्न कमांड की किन-किन मोर्चों पर क्या-क्या भूमिका रही, के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका के एंबेसडर सर्जियो गोर, एडमिरल सैमुअल जे. पापारो समेत अन्य सदस्य मौजदू रहे।
किससे और क्यों खतरा…. विस्तार से बताया
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आर्मी कमांडर के साथ देश की पश्चिमी सीमाओं पर रणनीतिक सुरक्षा और गतिशीलता के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन सीमाओं पर देश को किससे और किस तरह के संभावित खतरे रहते हैं, ये भी प्रतिनिधिमंडल को बताया गया। लिहाजा सीमाओं पर कमांड की ऑपरेशनल तैयारियां किस तरह पुख्ता रखनी पड़ती है, उस पर चर्चा की गई। अमेरिकन राजदूत को बताया गया कि किस तरह देश की सुरक्षा के लिए पश्चिमी सीमाओं की स्थिरता को मजबूत करने की जरूरत है और वेस्टर्न कमांड कैसे इसमे अहम भूमिका निभा रहा है।
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