उन्नाव के पुरवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल सिंह ने यूनिफॉर्म सिविल गाइडलाइंस (UGC), जाति व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर सवर्ण समाज, क्षत्रिय और ब्राह्मण शब्दों की व्याख्या की। कहा कि सवर्ण समाज ऐतिहासिक रूप से त्याग और तपस्या का प्रतीक रहा है और देश के लिए संघर्ष करता रहा है। विधायक असोहा ब्लॉक क्षेत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा- सवर्ण समाज हजारों वर्षों से आलोचना सहता आ रहा है। आज के समय में किसी अनुसूचित जाति (SC) या किसी भी वर्ग के व्यक्ति को अपशब्द कहने या डांटने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जो कानून के तहत सही है। विधायक ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में होने वाली रैगिंग और मारपीट का जिक्र किया। कहा कि पहले इन घटनाओं का आरोप सवर्ण समाज, विशेषकर ठाकुर और पंडित वर्ग पर लगाया जाता था। इसी संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय ने ऐसी अव्यवस्थाओं को समाप्त कर सामान्य और समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अभी कुछ मामलों में इन फैसलों को पूरी तरह लागू नहीं किया है, बल्कि उन पर विचार किया जा रहा है। विधायक ने फिल्मों और सामाजिक कथानकों में ठाकुर समाज को नकारात्मक रूप में दिखाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बावजूद सवर्ण समाज ने कभी संगठित विरोध नहीं किया। उन्होंने “ठाकुर का कुआं”, “ठाकुर का खेत” जैसे शब्दों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज ने इन्हें सहन किया है। इसी तरह ब्राह्मण भी जन्म से नहीं बल्कि कर्म से बनता है, जो समाज, राष्ट्र और विश्व कल्याण के लिए सोचता और सही मार्ग दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े और अनुसूचित समाजों में भी ऐसे बुद्धिमान लोग हैं, जिन्हें कर्म के आधार पर ब्राह्मण कहा जा सकता है।
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