देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि पर विवाह बाधा दूर करने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन शिखर के पंचशूल पर ‘मोर मुकुट’ अर्पित करने से शादी की अड़चनें खत्म होती हैं और रिश्ता पक्का हो जाता है. सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यहां गठबंधन पूजा का भी विशेष महत्व है.
क्या कहते है देवघर बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित:
बैद्यनाथ धाम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जो देश के अन्य किसी शिव मंदिर में देखने को नहीं मिलतीं. देवघर के तीर्थपुरोहित श्रीनाथ पंडित बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है. यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में चार प्रहर में विशेष पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान तीर्थपुरोहितों द्वारा षोडशोपचार विधि से भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है.
साल में सिर्फ एक ही दिन पंचशूल पर चढ़ता है मोर मुकुट:
साल में सिर्फ इसी एक दिन बाबा बैद्यनाथ के शिखर पर मोर मुकुट अर्पित किया जाता है, जो अपने आप में एक अनोखी परंपरा है.
देवघर के तीर्थपुरोहितों का कहना है कि जिन युवक-युवतियों की शादी में बार-बार अड़चन आ रही हो, रिश्ता बनते-बनते टूट जाता हो या विवाह में देरी हो रही हो, वे महाशिवरात्रि के दिन बाबा बैद्यनाथ को मोर मुकुट अर्पित कर सकते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं. वहीं, जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में तनाव, मनमुटाव या परेशानी चल रही हो, वे बाबा मंदिर में गठबंधन परंपरा निभाते हैं. यह परंपरा पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता लाने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए की जाती है.
श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है. यही कारण है कि हर साल महाशिवरात्रि पर देवघर आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है, जहां लोग अपने जीवन की हर समस्या का समाधान पाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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