उदयपुर जिले के 109 सरकारी स्कूलों में एक ही समय में दो-दो प्रिंसिपल कार्यरत हैं, जबकि जिले में प्रिंसिपल के 245 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें एक ओर 109 स्कूलों में दो-दो प्रिंसिपल हैं और दूसरी ओर 245 पद खाली पड़े हैं। दरअसल, 24 जनवरी 2025 को प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्यों को प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति दे दी गई थी, लेकिन अब तक उनका पदस्थापन नहीं किया गया। इसके कारण कई स्कूलों में पहले से कार्यरत प्रिंसिपल के साथ पदोन्नत प्राचार्य भी उसी विद्यालय में कार्य कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार उदयपुर जिले में प्रिंसिपल के 689 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 444 प्राचार्य कार्यरत हैं, जबकि 245 पद अभी भी रिक्त हैं। यदि ब्लॉक स्तर पर स्थिति देखें तो दूरदराज कोटड़ा ब्लॉक में प्रधानाचार्य के 44 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 8 पर ही प्राचार्य कार्यरत हैं और 36 पद खाली हैं। राज्य स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। राजस्थान में प्राचार्य के कुल 19,860 पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में लगभग 12,415 प्राचार्य ही कार्यरत हैं। इस प्रकार प्रदेश में करीब 5,445 पद रिक्त पड़े हैं। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले उप-प्रधानाचार्य और प्रधानाचार्य के पदों पर काउंसलिंग कर पदस्थापन कर दिया जाए तो यह विद्यार्थियों के हित में होगा। अब अधिकारों को लेकर खींचतान एक ही विद्यालय में दो प्राचार्य होने से प्रशासनिक अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति बन रही है। इससे स्टाफ में असमंजस और धड़ेबाजी की स्थिति पैदा हो रही है। इसका असर स्कूल के वातावरण और विद्यार्थियों के अनुशासन पर भी पड़ रहा है। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि शहर के नजदीकी स्कूलों में अपने चहेते चेहरों को लगाने के लिए पदस्थापन में देरी की जा रही है। हालांकि स्थानीय अधिकारी इसे बीकानेर स्थित निदेशालय का निर्णय बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। शहर से गांव तक एक जैसे हाल
उच्च माध्यमिक विद्यालय जगदीश चौक, फतेह स्कूल, सवीना खेड़ा, सुखेर, डाकन कोटड़ा, सरू, बलीचा, केवड़ा खुर्द, दातीसर (कुराबड़ ब्लॉक), वली (कुराबड़), बछार, एकलिंगपुरा, नाईघासा और पिपली सहित जिले के कुल 109 स्कूलों में दो-दो प्रिंसिपल कार्यरत हैं। इसी प्रकार जिले के कुछ विद्यालयों में एक ही संस्थान में 5-5 वाइस प्रिंसिपल भी कार्यरत हैं। इन स्कूलों में कुर्सियों पर नहीं हैं प्रिंसिपल राउमावि खाखरिया-कोटड़ा, राउमावि उमरिया-कोटड़ा, राउमावि जूनापदार-कोटड़ा, राउमावि खोजावाड़ा-ऋषभदेव, राउमाव ढेलाणा-ऋषभदेव, राउमावि बिछीवाड़ा-ऋषभदेव, राउमावि गुड़ली-कुराबड़, राउमावि बम्बोरा-कुराबड़, राउमावि सोमखेड़ा-कुराबड़, राउमावि ओबराकला-गोगुंदा, राउमावि डाडिया-गोगुंदा, राउमावि मोरवाल-गोगुंदा, राउमावि आकोला-भींडर, राउमावि आमलिया-भींडर, राउमावि अमरपुरा जागिर-भींडर सहित जिले के 245 स्कूलों में प्रधानाचार्यों के पद रिक्त पड़े हैं। निदेशालय से होगा निर्णय
“पदोन्नतियां तो कर दी गई हैं, लेकिन काउंसलिंग के बाद ही पदस्थापन किया जाएगा। इसके लिए निर्णय बीकानेर स्थित निदेशालय स्तर पर ही होगा।”
-डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
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