Gulal Got Tradition Jaipur Royal Holi In Udaipur: जयपुर राजघराने की 400 साल पुरानी ‘गुलाल गोट’ परंपरा अब उदयपुर के शिल्पग्राम में जीवंत हो रही है, जहाँ कलाकार लाख से हवा से भी हल्के शाही गोले बना रहे हैं. प्राकृतिक रंगों से भरे ये गुलाल गोट ₹400 प्रति पैकेट की दर से बिक रहे हैं, जो सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल शाही होली का अनुभव प्रदान करते हैं.
गुलाल गोट दरअसल लाख (Lac) से तैयार किए गए बेहद हल्के और खोखले गोले होते हैं, जिनके भीतर प्राकृतिक गुलाल भरा जाता है. इनकी सबसे बड़ी खूबी इनका वजन और बनावट है; ये इतने हल्के होते हैं कि हवा में तैरते हुए महसूस होते हैं. जब इन्हें किसी पर फेंका जाता है, तो ये जमीन या शरीर पर गिरते ही बिना किसी चोट पहुंचाए फूट जाते हैं और चारों ओर रंगों का गुबार बिखेर देते हैं. पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों और शुद्ध लाख से बने होने के कारण ये पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होते हैं. रसायनों से दूर रहकर पारंपरिक और सुरक्षित होली खेलने का यह एक शाही तरीका है, जिसे आज की पीढ़ी भी खूब पसंद कर रही है.
निर्माण की जटिल प्रक्रिया और शिल्पग्राम का हुनर
उदयपुर के शिल्पग्राम में इन दिनों लाख के सिद्धहस्त कलाकार गायुर अहमद अपनी टीम के साथ इन गुलाल गोटों को तैयार करने में जुटे हैं. गायुर अहमद बताते हैं कि एक गुलाल गोट बनाना धैर्य और कौशल का काम है. सबसे पहले कच्ची लाख को गर्म करके उसे अत्यंत मुलायम और लचीला बनाया जाता है. इसमें कुछ विशेष प्राकृतिक तत्व मिलाए जाते हैं ताकि वह कांच की तरह पतला हो सके. इसके बाद फूँक नली (Blow pipe) की मदद से लाख को फुलाया जाता है, जिससे वह एक पारदर्शी और खोखले गोले का आकार ले लेता है. ठंडा होने पर इनमें हर्बल गुलाल भरकर सावधानीपूर्वक बंद किया जाता है. यह कला सदियों से जयपुर के मनिहार समुदाय द्वारा सहेजी गई है, जो अब उदयपुर में भी लोकप्रिय हो रही है.
शाही होली का आकर्षण और बाजार में मांग
उदयपुर में इन गुलाल गोटों की मांग तेजी से बढ़ रही है. बाजार में इनका एक पैकेट करीब 400 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है. शाही अंदाज और पारंपरिक विरासत से जुड़े होने के कारण पर्यटक और स्थानीय निवासी इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं. यह न केवल एक उत्पाद है, बल्कि राजस्थान की उस समृद्ध शिल्प कला का प्रतीक है जो मशीनी युग में भी अपनी चमक बनाए हुए है. शिल्पग्राम जैसे मंचों के माध्यम से ऐसी लुप्त होती परंपराओं को नया जीवन मिल रहा है, जिससे न केवल कलाकारों को आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि नई पीढ़ी भी अपने गौरवशाली इतिहास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो रही है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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