उदयपुर में मेवाड़ संघर्ष समिति ने यूरिया खाद की कमी और कालाबाजारी के विरोध में कृषि भवन के बाहर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में गधे को गुलाब जामुन खिलाकर किसानों की मुश्किलों और अव्यवस्था का संदेश दिया गया. समिति के अध्यक्ष विष्णु पटेल ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान आज भी रासायनिक खाद पर निर्भर हैं और खाद की कमी उनके उत्पादन और आमदनी को प्रभावित कर रही है.
निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दाम वसूले जा रहे
मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, विष्णु पटेल, ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि किसानों को इन दिनों यूरिया खाद की कमी से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसान घंटों कतारों में खड़े रहने और दर-दर भटकने के बावजूद यूरिया खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं. कई जगहों पर खाद की कालाबाजारी हो रही है और जहां उपलब्धता है, वहां निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दाम वसूले जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी किसान ऐसे नहीं हैं जो ऑर्गेनिक खाद स्वयं तैयार कर सकें या अपने खेतों में उसका प्रयोग कर सकें. खासकर छोटे और सीमांत किसान आज भी रासायनिक खाद पर निर्भर हैं. ऐसे में यूरिया की कमी सीधे तौर पर उनकी फसल, उत्पादन और आमदनी को प्रभावित कर रही है. सरकार की ओर से समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए जाने से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है.
खाद वितरण व्यवस्था में लगाया अनियमितता का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं. यदि समय पर यूरिया खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो इसका असर फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर पड़ेगा, जिसका खामियाजा अंततः किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी भुगतना होगा. मेवाड़ किसान संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि किसानों को तुरंत पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध कराई जाए, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो और खाद को निर्धारित दरों पर ही बेचा जाए. समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
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