यह पल उनके परिवार के साथ-साथ पूरे मेवाड़ क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बन गया. पासिंग आउट परेड के दौरान जब प्रियवृत सिंह ने सेना की वर्दी में लेफ्टिनेंट का स्टार धारण किया, तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह भावुक और गौरवपूर्ण दृश्य था. मेवाड़ की वीर परंपरा को आगे बढ़ाने वाले इस युवा अधिकारी की उपलब्धि को पूरे क्षेत्र में सराहा जा रहा है.
ओटीए चेन्नई में हुई पासिंग आउट परेड
चेन्नई स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में कुल 345 भारतीय कैडेट्स को लेफ्टिनेंट के रूप में भारतीय सेना में कमीशन किया गया. इनमें 27 महिला कैडेट्स भी शामिल थीं. इसके अलावा अन्य देशों के 4 विदेशी कैडेट्स ने भी सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया.
कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण के लंबे दौर के बाद जब कैडेट्स अपने कंधों पर स्टार धारण करते हैं, तो वह केवल एक रैंक नहीं होती, बल्कि जिम्मेदारी, सम्मान और देश सेवा के संकल्प का प्रतीक बन जाती है. इस ऐतिहासिक समारोह में प्रियवृत सिंह शिवरती ने भी अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया.
वीरता की परंपरा से जुड़ा है परिवार
प्रियवृत सिंह शिवरती मेवाड़ की उस गौरवशाली परंपरा से आते हैं, जहां वीरता और देशभक्ति पीढ़ियों से विरासत के रूप में चली आ रही है. उन्होंने अपने परदादा मेजर महाराज उदय सिंह शिवरती के पदचिन्हों पर चलते हुए यह उपलब्धि हासिल की है. मेजर उदय सिंह शिवरती भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और वे मेवाड़ के पूर्व शासक महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के सगे काका थे.
ऐसे गौरवशाली परिवार से आने वाले प्रियवृत ने बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखा था. कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने अपने इस सपने को साकार कर दिखाया. उनकी सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि मेवाड़ की धरती आज भी वीर सपूतों को जन्म दे रही है.
खेल और शिक्षा में भी रही शानदार पहचान
प्रियवृत सिंह की शुरुआती शिक्षा इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज से हुई है. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई. वे राष्ट्रीय स्तर के राइफल शूटर रह चुके हैं और कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं. खेलों में सीखा गया अनुशासन और एकाग्रता उन्हें सेना के कठिन प्रशिक्षण के दौरान भी काफी काम आया. प्रियवृत के परिवार की पृष्ठभूमि भी काफी प्रेरणादायक रही है. उनके पिता इतिहास के प्रोफेसर होने के साथ-साथ क्रिकेट जगत से भी जुड़े हुए हैं और बीसीसीआई के अंपायर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
परिवार में शिक्षा, अनुशासन और देशभक्ति का वातावरण रहा, जिसने प्रियवृत को बचपन से ही बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया. आज जब प्रियवृत सिंह शिवरती भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा के लिए तैयार हैं, तब मेवाड़ की धरती एक बार फिर गर्व से कह रही है कि यहां की वीर परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है. युवा पीढ़ी के लिए प्रियवृत सिंह की यह उपलब्धि एक बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आई है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है.
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