पंजाब की सियासत में सबसे पुरानी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में एक बार फिर दो शक्ति केंद्र उभर गए हैं। बिक्रम सिंह मजीठिया के जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद ऐसी स्थिति बन रही है।
मजीठिया इन दिनों हाशिये पर पहुंचे अपने कैडर को फिर सक्रिय करने में जुटे हैं, वहीं शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल पहले ही खुद से नाराज पुराने अकालियों को पार्टी में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
ड्रग मनी केस के आरोपों में घिरे मजीठिया को जून 2025 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने के आरोप भी लगे और वे नाभा जेल में बंद थे। पिछले दिनों मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से इस केस में जमानत मिल गई है। उनकी रिहाई पर उनके समर्थकों ने गरमजोशी के साथ स्वागत किया था मगर उस दौरान शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल नहीं दिखे। चर्चाएं जब तेज हुईं तो रात को सुखबीर बादल मजीठिया से मिलने उनके घर पहुंचे। इस पर पार्टी की ओर से दावा किया गया था कि दिन में बादल कहीं व्यस्त थे।
सुखबीर के साथ एक मंच पर नहीं दिखे मजीठिया
उसके बाद मजीठिया अपने समर्थकों के साथ अमृतसर पहुंचे। अमृतसर में कार्यकर्ताओं के साथ वे विभिन्न मौकों पर माैजूद रहे मगर अभी तक कोई ऐसा कोई माैका नहीं आया है जब रिहाई के बाद सुखबीर किसी कार्यक्रम में मजबूती का भाव दिखाते हुए मजीठिया के खड़े हों।
सूत्र बताते हैं कि चुनाव से पहले मजीठिया के जेल से बाहर आने के बाद मजीठिया कैडर के कार्यकर्ताओं में तो खासा उत्साह है और पार्टी भी इसे अपनी मजबूती की तरह देख रही है मगर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं में इस बात को लेकर थोड़ा संशय भी है कि विरोधी सियासी दल मजीठिया पर लगे आरोपों और उनके फिर सियासत में सक्रिय होने को मतदाताओं के बीच एक राजनीति मुद्दा बना सकते हैं, क्योंकि ड्रग का मुद्दा पंजाब के चुनावों में हमेशा से ही ज्वलंत रहता है।
उधर शिअद के एक पदाधिकारी ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मजीठिया के बाहर आने के बाद पार्टी मजबूत हुई है। वे पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व कोर कमेटी के सदस्य हैं। पार्टी का अगला लक्ष्य साल 2027 के चुनाव जीतकर सरकार बनाना है।
हो चुकी है तकरार
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया के बीच एसजीपीसी की कार्यकारी समिति द्वारा बर्खास्त किए गए तख्त जत्थेदारों के मसले पर तकरार देखने काे मिल चुकी है। मार्च 2025 में मजीठिया और उनके समर्थकों ने इस फैसले का विरोध किया था। इसे पार्टी की पंथक एकता को कमजोर होने वाला बताया था। इस पर बादल के खास व शिअद के कार्यवाहक अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने एसजीपीसी के फैसले पर सवाल उठाने के लिए मजीठिया की निंदा करते हुए कहा था कि मजीठिया पर मुश्किल समय में पार्टी का साथ देने के बजाय शिरोमणि अकाली दल और सुखबीर बादल को कमजोर करने का आरोप लगाया था। मजीठिया पर पार्टी अनुशासन तोड़ने का भी आरोप लगा था।
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