कृषि वैज्ञानिक साओन चक्रवर्ती ने कहा कि सर्दियों में टमाटर की पैदावार ज्यादा होने के कारण पकने के साथ-साथ फटने समस्या बढ़ जाती है. इसका सबसे बड़ा कारण असंतुलित और अनियमित सिंचाई है
क्या कहते है कृषि वैज्ञानिक
देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक साओन चक्रवर्ती ने कहा कि सर्दियों में टमाटर की पैदावार ज्यादा होने के कारण यह समस्या और भी बढ़ जाती है. खासतौर पर जब ठंड अचानक बढ़ने लगती है, तब टमाटर पकने के साथ-साथ फटने लगता है. इसका सबसे बड़ा कारण असंतुलित और अनियमित सिंचाई है. कई बार किसान लंबे समय तक खेत में पानी नहीं देते और जब मिट्टी ज्यादा सूख जाती है, तब अचानक भारी सिंचाई कर देते हैं. इससे टमाटर का फल तेजी से बढ़ता है. लेकिन उसका छिलका उस दबाव को सहन नहीं कर पाता और फल फट जाता है. इसके अलावा पोटाश जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और तापमान में अचानक गिरावट भी फ्रूट क्रैकिंग की समस्या को बढ़ा देती है.
फटने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए करे यह खास उपाय
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अगर किसान थोड़ी सावधानी बरतें तो टमाटर फटने की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. सबसे पहले किसानों को चाहिए कि वे टमाटर का बीज किसी भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें और ऐसी किस्म का चयन करें, जिसका छिलका मोटा हो. इससे फल फटने की संभावना कम हो जाती है.इसके साथ ही खेत में नियमित और संतुलित सिंचाई करना बेहद जरूरी है, ताकि पौधों को अचानक ज्यादा पानी न मिले.इसके अलावा फसल को आवश्यक पोषक तत्व देने पर भी ध्यान देना चाहिए. पोटाश और कैल्शियम नाइट्रेट का समय-समय पर छिड़काव करने से टमाटर के फल मजबूत बनते हैं. फटने की समस्या कम होती है.वहीं खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है, क्योंकि पानी जमा होने से पौधों को नुकसान पहुंचता है. अगर किसान इन उपायों को अपनाते हैं, तो वे टमाटर फटने की समस्या से बच सकते हैं और अपनी फसल का बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं.
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