ठंड बढ़ते ही हाथों की त्वचा उतरना, परत बनना और छालों जैसे लक्षण की समस्या होती हैं, जिसे छत्तीसगढ़ में ‘हाथ का अपरस’ निकलना कहा जाता है. ऐसे में कुछ घरेलू टिप्स अपनाकर छुटकारा पा सकते हैं.
ठंड के मौसम में हाथों की परत (छालों) का निकलना, जिसे छत्तीसगढ़ में हाथ का अपरस (छालों का निकलना)भी कहा जाता है, यह ठंड में होने वाली एक बहुत बड़ी समस्या है, जो बहुत से लोगों में होती है. सर्द हवा में ठंडी के कारण हाथों की स्किन परतदार, खुरदुरी और सफेद निशान वाली दिखने लगती है, कई बार लगातार हाथ धोने, साबुन के ज्यादा इस्तेमाल और ठंडे पानी के संपर्क में रहने से भी यह समस्या और गंभीर हो जाती है, कुछ लोगों में इसमें जलन और हल्की खुजली भी होती है.

इसके बारे में आयुष चिकित्सक पी बी दीवान ने बताया कि ठंड में अक्सर हथेली से त्वचा के ऊपरी परत डेडसेल्स होकर निकलने लगते है, यह आमतौर पर त्वचा की नमी कम होने या एकदम कड़ाके की ठंड पढ़ने से होती है, गर्म पानी के अधिक उपयोग, या हल्के एक्ज़िमा के कारण होती है, इस परेशानी से बचने के लिए हाथों को मॉइस्चराइजर करना चाहिए.

वही बताया की अगर समय रहते देखभाल न की जाए तो यह परतदार सूखापन छोटी-छोटी दरारों ( फटने जैसे) में बदल सकता है, जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए त्वचा को इस मौसम में अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, जिसके लिए सुबह नहाने के बाद और रात में सोने से पहले हाथों पर मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए, अगर हो सके तो दस्ताने पहनना काफी फायदेमंद होता है.
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डॉ दीवान ने हाथों में छालों की बचाव के लिए घरेलू नुस्खों के उपयोग में बताया की नारियल तेल लगाना चाहिए इसमें एंटी-फंगल और मॉइस्चराइजिंग गुणों के कारण त्वचा को अंदर तक पोषण देता है, ग्लिसरीन लगाने से त्वचा की नमी को बंद करके लंबे समय तक हाथों को मुलायम बनाए रखती है, साथ ही गुनगुने पानी में नींबू की कुछ बूंदें और शहद मिलाकर हाथ धोने से भी आराम मिलता है.

हथेली में अपरस से बचाव के सावधानी बरतने की जरूरत होती है, जैसे कि सर्दियों में हाथों को बार-बार ठंडे पानी से धोने से बचें, और साबुन की जगह माइल्ड हैंडवॉश का उपयोग करें, प्राकृतिक तेलों का उपयोग करे, इससे ठंड में अपरस और त्वचा की परत निकलने की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.
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