उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले 25 दिनों से चल रहा बाघ गणना अभियान बुधवार को सफलतापूर्वक पूरा हो गया। इस अभियान के तहत जंगल में लगाए गए सभी ट्रैप कैमरों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटा लिया गया है। बाघ गणना के दौरान पूरे रिजर्व क्षेत्र में कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई, ताकि गणना कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
इस बार बाघ गणना का कार्य बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कुल नौ परिक्षेत्रों में दो चरणों में पूरा किया गया। गणना के लिए रिजर्व क्षेत्र के 650 चयनित स्थानों पर कुल 1300 ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के माध्यम से बाघों की गतिविधियों, संख्या और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया गया है। कैमरों की निगरानी, सुरक्षा और तकनीकी देखरेख के लिए 800 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और वनकर्मी लगातार तैनात रहे।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख और समृद्ध बाघ आवासों में गिना जाता है। पिछली बाघ गणना में यहां 165 से अधिक बाघ दर्ज किए गए थे, जिसके बाद यह रिजर्व देश में सबसे अधिक बाघ घनत्व वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया था। इसी वजह से इस बार की गणना के नतीजों को लेकर वन विभाग के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं में भी खासा उत्साह है।
बाघ गणना की समाप्ति पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि 25 दिवसीय अभियान पूरी तरह सफल रहा है। अब सभी ट्रैप कैमरों से प्राप्त फोटो और वीडियो डेटा को संकलित कर विश्लेषण के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) भेजा जाएगा। यहां वैज्ञानिक तरीके से डेटा का अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद बाघों की वास्तविक संख्या और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि बाघ गणना के अंतिम और आधिकारिक आंकड़े जुलाई 2027 तक जारी किए जाने की संभावना है। तब तक अंतरिम स्तर पर विश्लेषण का कार्य चलता रहेगा। वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखेगा।
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