प्रदेश के हजारों गांवों में किसान सब्जी और फूलों की खेती करते हैं लेकिन अपनी मर्जी से इन फसलों का बीमा नहीं करवा सकते। हर जिले में सरकार ने अलग-अलग नियम तय किए हुए हैं। किसी जिले में एक तो किसी में दो फसलों का बीमा करवाने की ही अनुमति है। चिह्नित फस
प्रदेश में 3 जिले तो ऐसे हैं, जहां रबी सीजन में उद्यानिकी फसलों में केवल एक ही फसल का बीमा कराने की अनुमति है। इनमें बांसवाड़ा-डूंगरपुर के किसान आम (फल), करौली के किसान केवल टमाटर की फसल का बीमा करवा सकते हैं। जबकि बाड़मेर और जैसलमेर के किसानों को रबी सीजन में उद्यानिकी की किसी भी फसल का बीमा करवाने की अनुमति नहीं है। इनके अलावा अन्य सभी जिलाें के लिए न्यूनतम 2 फसलों काे बीमित सूची में शामिल किया हुआ है। कुछ जिलों में तो 7 से अधिक फसलों का बीमा करवाने की सुविधा है।
बीमा के लिए कहां करें संपर्क
बीमा के लिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी, बीमा कंपनी के प्रतिनिधि या निकटतम कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। ऋणी किसान का बीमा संबंधित बैंक द्वारा स्वैच्छिक आधार पर कराने की छूट दी गई है। यदि ऋणी किसान बीमा नहीं करवाना चाहते तो उन्हें संबंधित बैंक में 24 दिसंबर तक लिखित घोषणा पत्र अनिवार्य तौर पर देना होगा। गैर ऋणी कृषक सीएससी या बीमा कंपनी के अधिकृत एजेंट या प्रतिनिधि के जरिए प्रक्रिया अपनाकर अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।
बांसवाड़ा में 150 गांवों में सब्जी-फूलों की खेती
खरीफ हाे या रबी, प्रदेश में अकेले बांसवाड़ा जिले में ही 100 से ज्यादा गांवों में किसान सब्जी और 50 से अधिक गांवों में गेंदे की खेती करते हैं। लेकिन ये अपनी मेहनत को बचाने के लिए सब्जियों और फूलों का बीमा नहीं करवा सकते। जिले में केवल आम की फसल का बीमा हो सकता है, जिसके लिए अंतिम तारीख 31 दिसंबर है। इधर, जिले में औसतन 3200 हैक्टेयर में आम की फसल होती है।
कांकरादरा गांव के किसान कचरू खराड़ी बताते हैं, मेरे 15 बीघा खेत में दशहरा, लंगड़ा , मल्लिका आम के पेड़ हैं। हर साल बीमा करवाता और 12 हजार रुपए से ज्यादा की किस्त देता हूं। हर साल आंधी में नुकसान हाेता है। आंधी-तूफान मई में आता है जबकि बीमा अवधि 30 अप्रेल को खत्म हाे जाती है। दूसरी ओर, उद्यानिकी उपनिदेशक दलसिंह गरासिया कहते हैं, बांसवाड़ा जिले में आम का रकबा बड़ा होने से यह फसल ही अधिसूचित है। इसके लिए तहसील क्षेत्र के कुल रकबा में फसल का रकबा देखा जाता है। उसमें कुल सब्जियों के बजाय एक ही फसल काे देखा जाता है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.