भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23 लोगों की मौत पर प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख का मुआवजा (राहत राशि) दिया गया, जबकि इसके पहले इसी तरह के हादसों में यह राशि काफी अधिक रही है। इंदौर में हुए बेलेश्वर महादेव मंदिर बावड़ी हादसे में जान गंवाने
चार महीने पहले एयरपोर्ट रोड पर हुए ट्रक हादसे के मृतकों को सरकार ने 4-4 लाख रुपए मुआवजा मिला। कुछ महीने पहले अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट क्रेश होने पर 260 लोगों को 1.25-1.25 करोड़ का मुआवजा दिया गया था।
जबकि भागीरथपुरा में हुई मौतों में मामले में सभी ने माना है कि यह सिस्टम की गलती से हुई है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कोर्ट में दुर्घटना या हादसों में जान गंवाने वालों की क्षतिपूर्ति तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन से पूरा फॉर्मेट तय है, तो सरकार मौतों पर राहत राशि देने के निमय-कायदे क्यों नहीं बनाती।
जस्टिस सुशील गुप्ता, पूर्व न्यायमूर्ति, मप्र
हादसों में मौत: कोर्ट ऐसे तय करती है मुआवजा
हादसे या एक्सीडेंट में मौत पर कोर्ट में क्षतिपूर्ति सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन से तय होती है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 (धारा 166 और 168) में प्रक्रिया और राशि तय करने का फॉर्मेट है। पहले देखते हैं हादसा किसकी लापरवाही से हुआ और मृतक का कितना दोष था। मृतक की उम्र, नौकरी या पेशे की वार्षिक आय, आश्रितों की संख्या और उनकी उम्र देखते हैं।
आय के अधिकृत दस्तावेज नहीं हैं, तो न्यूनतम वेतन आय मानी जाती है। भविष्य में होने वाली आय वृद्धि भी जुड़ती है। आय से मृतक के निजी खर्च घटाए जाते हैं। अमूमन अविवाहित होने पर 50 फीसदी और विवाहित होने पर 33 फीसदी हिस्सा घटाया जाता है। अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि व मानसिक पीड़ा के लिए तय रकम जोड़ी जाती है। दावा दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक का ब्याज (6 से 9%) जोड़कर राशि तय होती है।
योगेंद्र शर्मा, रिटायर्ड आईएएस
सरकारी मदद : प्रशासन की अनुशंसा से तय होती है
मप्र में हादसे, आगजनी, सरकारी निर्माण में लापरवाही आदि से मौत पर दी जाने वाली सहायता राशि अधिकांश मामलों में मुख्यमंत्री ही कलेक्टर या स्थानीय प्रशासन की अनुशंसा पर तय करते हैं। प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, अतिवृष्टि, सूखा, आकाशीय बिजली, भूकंप, लू, शीतलहर आदि) से मौतों पर जरूर केंद्र के आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के मानकों से राशि तय होती है।
कई मामलों में कलेक्टर की अनुशंसा के अलावा संभागायुक्त की रिपोर्ट, विभागीय नोटशीट और शासन की स्वीकृति से भी सहायता राशि तय होती है। राजस्व विभाग के राहत कोष और सीएम स्वेच्छा अनुदान में कुछ मामलों को लेकर राहत राशि तय है, जो 1 से 5 लाख तक है। प्रदेश में वन्यजीव–मानव संघर्ष नीति के तहत जरूर मौत होने पर सहायता राशि 25 लाख तय है।
हादसों में अलग-अलग हो सकती है राशि
प्राकृतिक आपदाओं में जान जाने या अन्य नुकसान होने पर दिए जाने वाली अनुग्रह राशि के लिए अलग अलग नियम हैं। दुर्घटनाओं और हादसों में जान जाने को लेकर कोई नियम नहीं हैं। मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान के तहत पीड़ित पक्ष को राहत राशि देते हैं। अलग अलग घटनाओं में यह राशि अलग हो सकती है। – डॉ. सुदाम खाड़े, संभागायुक्त, इंदौर
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