चित्रकूट। कर्वी शहर की एसडीएम कॉलोनी में 33 बच्चों का यौन शोषण कांड आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया। पांच साल की सुनवाई के बाद बांदा की विशेष अदालत ने सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। फैसले की खबर मिलते ही एसडीएम कॉलोनी मोहल्ले में लोगों ने राहत की सांस ली। स्थानीय निवासियों ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध के लिए कड़ी से कड़ी सजा जरूरी थी।
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-चित्रकूट की गली से खुला था मामला
मूल रूप से बांदा के नरैनी खरौंज निवासी रामभवन की तैनाती कर्वी में 2009-10 में हुई थी। वर्ष 2004 में उसकी शादी दुर्गावती से हुई थी। वह अर्जुन सहायक परियोजना महोबा और रसिन बांध परियोजना चित्रकूट का कार्य देख रहा था। पोस्टिंग के शुरुआती दिनों में उसने सिकरी गांव निवासी कक्कू सिंह का मकान किराए पर लिया था। मकान मालिक के अनुसार पड़ोसियों ने संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत की थी। जेई ने भोजन बनाने के लिए एक महिला को रखा था, उसकी दो बेटियां भी वहां आती-जाती हैं। संदेहजनक हरकतें देखी गई तो डेढ़ माह में ही उससे घर खाली करा लिया था।
इसके बाद उसने एसडीएम कॉलोनी स्थित मकान की ऊपरी मंजिल पर वह किराए से रहता था। नीचे मकान मालिक का परिवार रहता था। शुरू में पत्नी साथ रही, बाद में उसका आना-जाना लगा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार रामभवन शांत और सामान्य व्यवहार वाला दिखता था। वह सुबह दफ्तर जाता और शाम को लौटता। बच्चे दूध या छोटे-मोटे काम से उसके यहां जाते थे। देर होने पर गेम खेलने की बात कह देते थे, जिससे किसी को संदेह नहीं हुआ।
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लॉकडाउन में बढ़ी गतिविधियां :
वर्ष 2020 के लॉकडाउन में वह गांव नहीं गया। आरोप है कि इसी दौरान बच्चों को मोबाइल, टीवी गेम और अन्य सामान का लालच देकर बुलाया गया। जांच में सामने आया कि बच्चों के साथ दुष्कर्म कर वीडियो बनाए और उन्हें इंटरनेट के जरिए साझा किया गया। मामला उजागर होने पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। छापेमारी में पेन ड्राइव, लैपटॉप और मोबाइल बरामद हुए। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 33 बच्चों के शोषण की पुष्टि हुई। सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर डार्कनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाल यौन शोषण सामग्री साझा करता था। ईमेल जांच में विदेशी और भारतीय संपर्कों से संवाद के साक्ष्य मिले।
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मिलनसार था पत्नी का स्वभाव
जांच में दुर्गावती की संलिप्तता भी सामने आई। आरोप था कि वह बच्चों को बुलाने में मदद करती थी और विरोध की स्थिति में दरवाजा बाहर से बंद कर देती थी। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि दुर्गावती मिलनसार स्वभाव की थी। जब भी वह गांव से आती तो ज्यादातर मोहल्ले की महिलाओं के साथ उठती बैठती थी। बच्चों को भी खूब दुलराती थी। वहीं बच्चे भी उसके साथ हंसते खेलते थे। कई बच्चे तो दिनभर उसके घर में ही मोबाइल व टीवी के लालच में पड़े रहते थे।
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तीन साल तक नहीं खाली हुआ कमरा
सजा सुनाए जाने के बाद भी एसडीएम कॉलोनी का कमरा तीन साल तक खाली नहीं हुआ। वर्ष 2023 में आरोपी का भाई सामान ले गया, लेकिन तीन साल का किराया नहीं चुकाया। घटना के बाद मोहल्ले में लंबे समय तक लोग किराए पर कमरा देने से हिचकिचाते रहे। आज भी उस गली में सन्नाटा पसरा रहता है।
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सरल सीधे स्वभाव होने से नहीं लगा यह ऐसा भी कर सकता है
विभाग में साथ करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि रामभवन दफ्तर में हमेशा खुशमिजाज तरीके से रहते थे। सीधे-सादे स्वभाव का रामभवन काम के प्रति जिम्मेदार व कभी किसी को पलट कर कोई जवाब नहीं दिया लेकिन कंप्यूटर में अलग-अलग कंट्री के कुछ साइटों को देखते थे। कई बार इसके विषय में पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पहले भी वह कई-कई दिनों तक घर नहीं आते वह अपने घर केवल रुपये भेजते थे।
फोटो- 31 – 19 नवंबर, 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित विस्तृत खबर। संवाद

फोटो- 31 – 19 नवंबर, 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित विस्तृत खबर। संवाद

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