जिस कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन होते हैं, विरोध में नेताओं के पुतले जलाए जाते हैं, जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगाए जाते हैं—मंगलवार को उसी कलेक्ट्रेट परिसर का नजारा अलग था। परिसर में यज्ञ किए गए, आहुतियां दी गईं। नारे लगाने की जगह मंत्र पढ़े ग
साधु-संत समाज की अगुवाई में गोचर भूमि अधिग्रहण के विरोध में रुद्राभिषेक व सद्बुद्धि यज्ञ हुआ। अगुवाई कर रहे संत सरजू दास महाराज ने आहुतियों के साथ प्रशासन और सरकार को सीधी चुनौती दी। कहा, गोचर किसी भी सूरत में नहीं जाने देंगे। आंदोलन अब संत कर रहे हैं, इसलिए जल्दी ही देशभर के संतों का इस आंदोलन में आने के लिए आग्रह करेंगे। बोले, अगर हमें गोचर भूमि की रक्षा के लिए देह भी त्यागनी पड़े तो हम पीछे नहीं हटेंगे। सरकार की सद्बुद्धि के लिए 151 वैदिक ब्राह्मणों ने गोपाल गो यज्ञ व रुद्राभिषेक किया।
गोचर आंदोलन के संयोजक शिव गहलोत ने बताया कि 151 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार पंडित राजेंद्र किराडू व पुजारी बाबा के आचार्यत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संत विमर्शानंद महाराज, श्याम सुंदरजी महाराज, नवल रामजी महाराज, संतोषानंद महाराज, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल, पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत, सुमित कोचर, योगेश गहलोत, भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया, दिलीप पुरी, भाजयुमो शहर अध्यक्ष वेद व्यास, भाजयुमो देहात अध्यक्ष जसराज सींवर, नवरत्न डागा, जिया-उर-रहमान, साजिद सुलेमानी, भाजपा नेता राजकुमार किराडू, नितिन चढ़ा, मनीष पुरोहित, सूरज प्रकाश राव, मनोज कुमार सेवग, सांवरमल धायल, बंसीलाल तंवर, महेंद्र पडिहार आदि उपस्थित रहे।
भास्कर इनसाइट — संत सड़क पर, भाजपा-सरकार के लिए मुसीबत
संत समाज गोचर के लिए सड़क पर आ गया। कलेक्ट्रेट में किया गया सद्बुद्धि यज्ञ सरकार और भाजपा के लिए मुसीबत इसलिए है क्योंकि भाजपा हमेशा साधु-संतों को लेकर ही आगे बढ़ी है। जब हिंदू कार्ड खेला तो इसी समाज को आगे किया। अब वही संत समाज गायों के मुंह का निवाला बचाने के लिए जब सड़क पर है, तो भाजपा और सरकार के लिए गले की फांस बन गया है।ना तो संत समाज पर भाजपा और सरकार कोई टिप्पणी कर सकती है और ना ही इनके मुद्दे का खुलकर समर्थन कर पा रही है। यही वजह है कि अब भाजपा और सरकार बैकफुट पर हैं। अगर संत समाज और आगे बढ़ा तो सरकार को दिक्कत होना तय है।
आदेशों से बंधा बीडीए, समाधान का सूत्र सरकार के हाथ
बीकानेर विकास प्राधिकरण ने राजस्व, यूडीएच समेत तीन प्रमुख सचिवों के आदेश के बाद गोचर को अपने प्लान में लिया। बीडीए की सबसे बड़ी गलती यह रही कि जमीन को अराजीराज कर दिया। यहां से आंदोलन बढ़ गया। यह एक तरह का आंदोलनकारियों को चिढ़ाने जैसा निर्णय था।हालांकि उसके बाद बीडीए ने लीपापोती कर कोशिश की कि गोचर जमीन पर कोई निर्माण नहीं होगा, मगर वहां ई-बसों का स्टैंड बनाया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय भी गोचर पर ही बनाया गया था, तब भी सांत्वना दी गई थी, मगर अब गोचर नहीं जाने देंगे।
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