फफूंद। नगर पंचायत द्वारा मथुरा से बुलाई गई टीम ने मोहल्ला कायस्थान में जल्दबाजी दिखाते हुए कमरे में कैद बंदर को पकड़ने का प्रयास किया।
इस दौरान फंदा ढीला पड़ने पर कटखना बंदर भाग निकला और वह टीम के सदस्यों पर झपट पड़ा। इससे लोगों में दहशत फैल गई, हालांकि बाद में मकान मालिक ने मशक्कत कर बंदर को फिर से कमरे में बंद कर दिया।
कस्बे के मोहल्ला कायस्थान में 17 जनवरी को एक बंदर ने सात लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। घटना के बाद घायल मनोज दुबे ने मोहल्ले के युवकों की मदद से बंदर को अपने घर के बाहरी कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने बंदर को पकड़वाने के लिए वन विभाग, नगर पंचायत सहित मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उधर, लगातार कमरे में कैद रहने से बंदर और अधिक उग्र हो गया। घर के भीतर उसकी चीख-पुकार और उछल-कूद से मनोज दुबे का परिवार भी भय और तनाव में रहा। शुक्रवार को नगर पंचायत द्वारा मथुरा से बंदर पकड़ने वाली टीम बुलाई गई। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने फंदे की मदद से बंदर को पकड़ लिया, लेकिन फंदे में फंसते ही वह काफी आक्रामक हो उठा और पकड़ने वाले युवकों पर झपट पड़ा।
इसी अफरातफरी के बीच फंदा ढीला पड़ गया और बंदर पकड़ से छूटकर भाग निकला। इससे मोहल्ले में फिर से भय का माहौल बन गया। इस बीच मकान मालिक मनोज दुबे ने कुछ लोगों को साथ लेकर कड़ी मशक्कत करते हुए बंदर को दोबारा अपने घर के कमरे में बंद कर दिया। मनोज दुबे ने बताया कि बंदर सभी के लिए खतरा बना हुआ है। उसे किसी तरह दोबारा बंद किया है। उन्होंने वन विभाग के रेंजर से भी बात की तो बताया गया कि शनिवार को वन विभाग की टीम आकर रेस्क्यू करेगी।
मोहल्ले के कृपा शंकर शुक्ला, नीटू पांडे, राजू पांडे, सोनू अग्निहोत्री, श्यामू और धीरू शर्मा ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग की रेस्क्यू टीम आकर बंदर को बेहोश कर पकड़ती तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
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