वर्तमान में साइबर फ्रॉड एक बड़ी समस्या बन गया है। केंद्र सरकार लगातार इसको लेकर जागरूक कर रही है। आरबीआई से लेकर स्थानीय पुलिस भी लोगों को आगाह करती रहती है। इसके बावजूद अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग इसकी जद में आकर करोड़ों रुपए गंवा रहे हैं। इस साइबर फ्रॉड ने कितनों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। इसी समस्या को देखते हुए भास्कर ने साइबर अपराध के तरीकों की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि लोगों को ठगने के लिए साइबर अपराधी नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। अब जालसाज खुद को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर ठगी कर रहे हैं। इसके लिए ठग मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर लोगों को ठगने के लिए सिम डिएक्टिवेट व केवाईसी फ्रॉड, मोबाइल टावर लगाने, फर्जी सरकारी पत्र से धमकी और डिजिटल अरेस्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ठग लोगों को मैसेज या कॉल कर बताते हैं कि उनका सिम कार्ड दो घंटे में बंद हो जाएगा। फिर केवाईसी अपडेट के नाम पर एक लिंक भेजते हैं या ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं। लिंक में जानकारी भरने या ऐप डाउनलोड करने पर ठग सिम स्वैप या कॉल-एसएमएस फॉरवर्डिंग सक्रिय कर लेते हैं। इसके बाद बैंकिंग ओटीपी लेकर खाते से राशि ठग लेते हैं। पहले किराये का झांसा, फिर सर्वे के नाम पर ठगी ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में यह स्कैम तेजी से बढ़ रहा है। ठग भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अधिकारी बनकर जमीन मालिकों को फोन करते हैं। फिर उनकी जमीन पर मोबाइल टावर लगाने और इसके बदले हर महीने 20 से 50 हजार रुपए किराया और लाखों रुपए का एडवांस देने का लालच देते हैं। विश्वास दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज और एग्रीमेंट भी भेजे जाते हैं। बाद में रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या सर्वे शुल्क के नाम पर पैसे ठग लेते हैं। फर्जी सरकारी पत्र से धमकी ठग भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के नाम से फर्जी लोगो और लेटरहेड तैयार करते हैं। फिर इन पर फर्जी केस लिखकर ई-मेल या वाट्सएप पर भेजते हैं। इसमें कानूनी कार्रवाई या सिम बंद करने की चेतावनी दी जाती है, ताकि डर के मारे व्यक्ति उनकी मांगों को मान लें। फिर केस निस्तारण का झांसा देकर ठग लेते हैं। पुलिस-सीबीआई अधिकारी बन करते हैं डिजिटल अरेस्ट
इस तरीके में जालसाज खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम या ईडी का अधिकारी बताते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। इसके बाद व्यक्ति को वीडियो कॉल पर जोड़कर हिरासत में ले लेने जैसा माहौल बनाया जाता है। फिर मामले को खत्म करने के लिए तुरंत रकम ट्रांसफर करने को कहते हैं। समाज में इज्जत और डर के कारण कई लोग ठगों को पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। भास्कर एक्सपर्ट- विनय चौधरी, साइबर एक्सपर्ट और उप पुलिस अधीक्षक, उदयपुर डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.