मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजराइल संघर्ष का असर अब भारत के शहरों तक दिखाई देने लगा है। अजमेर में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस की कमी के चलते कई होटल संचालक अब पारंपरिक ईंधन यानी लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे हैं, जिससे शहर में इनकी मांग तेजी से बढ़ गई है।
‘गैस नहीं मिलने से बढ़ी लकड़ी की मांग’
शहर के उसरी गेट स्थित लकड़ी की टाल के संचालक हीरा लख्यानी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालक बड़ी मात्रा में लकड़ी खरीदने पहुंच रहे हैं। पहले जहां लकड़ी और कोयले की मांग सीमित थी, वहीं अब लगातार ऑर्डर बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि गैस की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो लकड़ी और कोयले की मांग और बढ़ सकती है।

ढाबों से लेकर बड़े होटल भी खरीद रहे लकड़ी
खजाना गली में लकड़ी का कारोबार करने वाले मान केवलारामानी ने बताया कि छोटे ढाबों से लेकर बड़े होटल संचालक भी अब लकड़ी और कोयला खरीद रहे हैं। फिलहाल रमजान के कारण दरगाह बाजार क्षेत्र के कई होटलों में ग्राहकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन रमजान समाप्त होने के बाद पर्यटकों और जायरीन की संख्या बढ़ने से मांग और बढ़ने की संभावना है।
20% से बढ़कर 80% तक पहुंची बिक्री
व्यापारियों के अनुसार पहले लकड़ी और कोयले की बिक्री लगभग 20 प्रतिशत तक सीमित रहती थी, लेकिन गैस की कमी के बाद यह बढ़कर करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कई होटल संचालकों ने भविष्य की जरूरत को देखते हुए लकड़ी और कोयले की एडवांस बुकिंग भी करवा दी है।
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सप्लाई पर भी पड़ सकता है असर
व्यापारियों का कहना है कि यदि गैस संकट लंबे समय तक बना रहा तो अचानक बढ़ी मांग के कारण लकड़ी की सप्लाई पर भी दबाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों में भी दिखने लगा है, जहां गैस की कमी के कारण होटल व्यवसायी फिर से पारंपरिक ईंधन यानी लकड़ी और कोयले की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
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