जबलपुर में शैक्षणिक कार्य के लिए नगर निगम द्वारा रियायती दर पर आवंटित की गई जमीन को कथित रूप से अपने नाम दर्ज कराकर दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जांच के बाद जॉय एजुकेशन सोसायटी के तत्कालीन चेयरमेन और आधारताल के तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ईओडब्ल्यू से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकुमार, निवासी जीआरसी ऑफिस मेस के समीप, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नगर निगम जबलपुर के अंतर्गत प्लॉट नंबर-440, डायवर्सन शीट नंबर 152-सी की 7500 वर्गफुट भूमि जॉय एजुकेशन सोसायटी को शैक्षणिक कार्य हेतु रियायती दर पर 30 वर्षों की लीज पर आवंटित की गई थी। इस लीज का वर्ष 2022 में पुनः 30 वर्षों के लिए नवीनीकरण किया गया था। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार उक्त भूमि की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 3.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
लीज नवीनीकरण के बाद अपने नाम कराई भूमि
जांच में सामने आया कि लीज नवीनीकरण के बाद जब उक्त भूमि पर अस्पताल भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, तब जॉय एजुकेशन सोसायटी के चेयरमेन अखिलेश मेबन ने आधारताल के तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के साथ कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र रचकर नगर निगम को धोखे में रखा। शैक्षणिक प्रयोजन के लिए दी गई इस भूमि का मालिकाना हक बिना किसी वैधानिक दस्तावेज के अपने नाम दर्ज करा लिया गया।
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ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया प्रकरण
मामले की पुष्टि होने के बाद ईओडब्ल्यू ने अखिलेश मेबन और तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है।
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