{“_id”:”69919fa9faa846213703ddff”,”slug”:”the-history-of-the-snake-god-was-conveyed-to-the-devotees-through-song-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-154216-2026-02-15″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Rampur Bushahar News: नाग देवता के इतिहास को गीत के माध्यम से पहुंचाया श्रद्धालुओं तक”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
आनी (कुल्लू)। सीरीगढ़ क्षेत्र के आराध्य गढ़पति कुईकंडा ब्यूंगली नाग देवता की ऐतिहासिक गाथा अब एक विशेष भक्ति गीत के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाई गई है। आनी के सीरीगढ़ क्षेत्र में पूजित नाग देवता के जन्म और उनकी दिव्य लीलाओं पर आधारित यह गीत आस्था और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। मान्यता है कि प्रभु का जन्म कुईकंडा स्थान पर हुआ, जहां से उन्होंने अपनी दिव्य शक्तियों का विस्तार किया। इस भक्ति गीत में नाग देवता के चमत्कारों, उनके समृद्ध इतिहास और क्षेत्र पर उनकी कृपा का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। गीत को प्रसिद्ध गायक रिंकू सीरीगढ़िया ने स्वर दिया है, जबकि संगीत एनजे जोशी ने तैयार किया है। सीरीगढ़ के आराध्य नाग देवता माता बूढ़ी नागिन के अठारह पुत्रों में सबसे छोटे और उमड़ा पुत्र माने जाते हैं। वह नौ पंचायत और छह फाटी के इष्ट देव हैं। बिझी बादली यानी वर्षा के देवता के रूप में पूरे कुल्लू क्षेत्र में विख्यात हैं। इतिहास में कुल्लू के राजाओं की ओर से नाग देवता की महिमा स्वीकार कर उन्हें चांदी अर्पित करने के उल्लेख भी मिलते हैं। वर्तमान में नाग देवता का भव्य मंदिर शगोगी में स्थित है। क्षेत्र की समृद्धि और रक्षा के लिए हर तीन या पांच वर्ष में विशेष पूजा आयोजित की जाती है, जिसे सीरीगढ़ का रक्षा सूत्र माना जाता है। श्रद्धालुओं ने नाग देवता से क्षेत्र पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की है।