मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) को सरकार की तरफ से दिया गया अनुदान वापस नहीं मांगा जाएगा। उन्होंने कहा, मैं उनमें नहीं हैं जो दी हुई चीज को वापस मांग लेते हैं।
मुख्यमंत्री ने वीरवार को जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से संस्थान कोहर साल करीब 24 करोड़ रुपये की ग्रांट दी जाती रही है। 2020-21 में यह ग्रांट 19.70 करोड़ रुपये थी। इसे बाद में बढ़ाकर 21 करोड़ रुपये किया गया।
2021-22 में ग्रांट को 23 करोड़, 2022-23 में 24 करोड़ किया गया। तब से यह 24 करोड़ तय है। इस बजट में इस ग्रांट को 26 करोड़ करने की तैयारी थी। अब मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने के बाद सरकार की तरफ से ग्रांट के तौर पर कॉलेज को दी गई इस धनराशि पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार धनराशि वापस नहीं लेगी। उमर ने कहा कि छात्रों ने नीट परीक्षा पास की है और वे योग्य हैं और यह राज्य की जिम्मेदारी है कि उन्हें उनके घर के पास के मेडिकल कॉलेज में जगह दी जाए ताकि उन्हें कम से कम परेशानी हो।
मुख्यमंत्री ने जम्मू में ई-पाठशाला का भी उद्घाटन किया और कहा कि अगर इस प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह कई बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा बेरोजगारी के मुद्दे पर अक्सर सवाल उठाती है लेकिन मान्यता रद्द होने के बाद मेडिकल क्षेत्र में भविष्य बनाने के इच्छुक युवाओं का क्या बनेगा इसका जवाब भी देना होगा।
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