अल्मोड़ा में नए साल की शुरुआत ही जिले के जंगलों में आग लगने की घटनाओं से हुई। रानीखेत सहित चार अलग-अलग इलाकों में लगी आग ने वन संपदा को नुकसान पहुंचाया। फायर यूनिट और वन विभाग के लिए आग बुझाना चुनौती बन गया।
बृहस्पतिवार को बिनसर के गैराड़ जंगल, मुक्तेश्वर रोड पर क्वारब के पास, गोलना करड़िया क्षेत्र के बख सरसों गांव के पास और रानीखेत के झूला देवी मंदिर के पास जंगल में आग लग गई। लंबे समय से बारिश न होने के कारण जंगल आग के लिए संवेदनशील हैं। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि फायर यूनिट लगातार आग बुझाने में लगी रही। एक तरफ आग बुझाते और दूसरी तरफ नए हिस्सों में आग लगने की घटनाओं ने अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी नरेंद्र सिंह कुंवर ने बताया कि एमएफई और होज रील की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। हालांकि, जंगल की सूखी पत्तियों और झाड़ियों की वजह से आग जल्दी फैल रही थी। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से जंगलों में आग न लगाने और सतर्क रहने की अपील की है।
फायर सीजन से पहले आग की घटनाएं होने से वन विभाग की बढ़ी टेंशन
15 फरवरी से वन विभाग का फायर सीजन शुरू होता है। इस बार फायर सीजन से पहले ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। कड़ाके की ठंड में आग लगने की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं वन्यजीवों को भी खतरा बना हुआ है। बारिश न होने के चलते जंगलों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इससे वन विभाग की टेंशन भी बढ़ गई है।
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