एक दशक से लटका पड़ा है 2000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट
मनाली से औट तक हर साल ब्यास नदी की बाढ़ में हो रहा करोड़ों का नुकसान
अमीचंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। एक दशक से मनाली के पलचान से औट तक ब्यास का तटीकरण की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। वर्ष 2025 को भी नदी किनारे बसे हजारों लोगों को सपना पूरा नहीं हो पाया है।
करीब 2,000 करोड़ रुपये की इस योजना का मामला केंद्र सरकार में फंसा है। अभी डीपीआर को मंजूरी नहीं मिलने से प्रोजेक्ट लटका हुआ है।
जिले में हर साल मानसून के दौरान ब्यास नदी की उफनती धारा में लोग अपने आशियानों को कब तक गंवाते रहेंगे। सरकार की ओर से ब्यास नदी के तटीकरण का कार्य अधर में ही लटका हुआ है। केंद्र सरकार को प्रदेश सरकार ने फाइल तो भेज दी है मगर केंद्र सरकार भी इस पर गंभीरता से पहल नहीं कर रही है। इसका खामियाजा जिला कुल्लू के समेत मंडी हजारों लोग भुगत रहे हैं। कुल्लू में 1995,1998 में भारी बाढ़ के कारण जिले में भारी तबाही मचाई थी। 2003 में भी ब्यास नदी में आई बाढ़ की वजह से करोड़ों का नुकसान हुआ। 2023 में कई नेशनल हाईवे चंडीगढ़-मनाली को जगह-जगह से तबाह हो गया। कई पुल और लोगों के मकान और दुकानें उफनती ब्यास की धारा में बह गई।
इस साल भी ब्यास ने भारी तबाही मचाई और मनाली से लेकर कुल्लू-औट तक हाईवे तीन, पुलों और लोगों के मकान, दुकानें और जमीन को तेज प्रवाह बहा कर ले गई। इस कारण जिला के लोगों का पूरी तरह से जनजीवन अस्त व्यस्त हुआ। हिमाचल से भाजपा के चार सांसद लोकसभा और तीन सांसद राज्य सभा में प्रतिनिधित्व कर रहे है। केंद्र सरकार में एक केंद्रीय मंत्री भी है। लेकिन तमाम सांसद ब्यास के तटीकरण के लिए स्वीकृत करने में विफल हो रहे हैं। लोगों के बीच चर्चा है मोदी अपने दूसरे को ही भूल गए है। विपक्ष भी तंज कस रहा है केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से पहल नहीं कर रहा है। मान सिंह, देवी सिंह, अमर सिंह, दीनानाथ, सुरेंद्र कुमार, संजय शर्मा व मोहर सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट न केवल ब्यास नदी की तबाही को कम करेगा बल्कि नदी किनारे हजारों लोग भी भयमुक्त जीवन गुजार सकेंगे।
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