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निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावास प्रभारी से छात्रों की अनुपस्थिति का कारण पूछा। इस पर प्रभारी ने बताया कि छात्र दोपहर तक छात्रावास में मौजूद थे, लेकिन शाम को कड़ाके की ठंड के चलते अपने-अपने घर चले गए। इस जवाब पर भी कलेक्टर ने नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि ठंड से बचाव के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं क्यों नहीं की गईं।
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने भी टीकमगढ़ जिले के तीन छात्र छात्रावासों का निरीक्षण किया था।
उस दौरान भोजन की गुणवत्ता खराब पाई गई थी, शौचालयों की हालत बेहद खराब थी और छात्रों के लिए ठंड से बचाव हेतु पर्याप्त गर्म कपड़े उपलब्ध नहीं थे। मंत्री के निरीक्षण के बाद कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुधारने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
इसके बावजूद आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। इसका नतीजा गुरुवार रात कलेक्टर के औचक निरीक्षण में सामने आया, जहां अधिकांश छात्र छात्रावास से गायब मिले। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जल्द ही कार्रवाई की जा सकती है।
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