झारखंड की राजधानी रांची में तेजी से क्लाइमेट चेंज हो रहा है। राजधानी बनने के बाद रांची का विस्तार एवं विकास तेजी से हुआ। यह शहर अपने बढ़ते रोजगार के मौकों, हेल्थ और एजुकेशन सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में तरक्की की वजह से लगातार माइग्रेंट्स को अपनी ओ
रांची के बदलते क्लाइमेट को लेकर वन पर्यावरण जलवायु परिवर्तन विभाग और सेंटर फॉर एनवायरमेंट एवं एनर्जी डेवलेपमेंट (सीड) ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में राज्य की डेवलपमेंट प्लानिंग में क्लाइमेट रेजिलिएंस को शामिल किया गया। इसमें आठ प्रमुख सेक्टरों खेती, पानी, जंगल, एनर्जी, शहरी विकास, हेल्थ, डिजास्टर मैनेजमेंट और आजीविका-सेक्टर के हिसाब से बदलाव आदि शामिल रहे।
23 साल में कम हुआ ग्रीन लैंड
रांची नगर निगम में 2001 से 2023 तक लैंड यूज और लैंड कवर क्लास के एनालिसिस से लैंड यूज पैटर्न में बड़ा बदलाव आया। ग्रीन कवर एरिया 35.78 किमी से घटकर 26.19 किमी रह गया। वहीं यूज लैंड जो 18.16 किमी से बढ़कर 34.48 किमी हो गया। यानी 16.32 की बढ़ोतरी हुई। जो तेज शहरी विकास व आबादी में बढ़ोतरी को दिखाता है।
बदलता गया मौसम का मिजाज
चट्टानी पहाड़ियों, हरियाली, तालाब, झरनों एवं नदियों के कारण रांची का मौसम खुशनूमा रहता है। मगर दो दशकों में इसमें काफी परिवर्तन आया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में शहर की हरियाली 28% घटी है। हरियाली कम होने के कारण रांची बारिश की समस्या का सामना करने लगा। गर्मी में अधिक गर्मी का अनुभव होने लगा।
रांची के कई क्षेत्रों का आबादी घनत्व अधिक बढ़ा
शहर के विकास एवं विस्तार के दृष्टिकोण से कई ऐसे मुहल्ले एवं कॉलोनी हैं जिसका आबादी घनत्व बढ़ा है। इसमें लालपुर, चुटिया, नामकुम, हरमू, अरगोड़ा, हिंदपीढ़ी, कडरू, मोरहाबादी और कांके आदि शामिल हैं। इन इलाकों में घनत्व बढ़ने के साथ सुविधाएं नहीं बढ़ीं। रिपोर्ट के अनुसार अब भी वार्डों में 40% से अधिक घरों में रेगुलर कचरे का उठाव नहीं होता है।
भास्कर एक्सपर्ट – रवि रंजन, आईएफएस एवं नोडल पदाधिकारी क्लाइमेट चेंज
विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में रिपोर्ट कारगर साबित होगी
यह रिपोर्ट निश्चित तौर पर आंख खोलने वाली है। जलवायु परिवर्तन से निबटने में शहरी विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में कारगर साबित होगी। आगे इसके आधार पर ठोस नीतियां एवं कारगर नीतियां बनानी होगी, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निबटा जा सके।
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