इंजीनियर्स कितने ताकतवर हैं और उनसे भी बड़े ताकतवर हैं ठेकेदार। क्योंकि इन दोनों ने मिलकर न सिर्फ कलेक्टर की मियाद को तोड़ा बल्कि संभागीय आयुक्त की 30 नवंबर तक डामरीकरण पूरा करने की मियाद को भी पार कर दिया। आज 8 दिसंबर है। यानी जो काम एक सप्ताह पहले
दरअसल दीवाली से पहले सड़कें जर्जर थीं। 22 सितंबर को कलेक्टर ने दीवाली तक शहर की सड़कें दुरुस्त करने के आदेश दिए थे। जानकारी हैरानी होगी कि दीवाली तक सिर्फ दो सड़कें ही बनी थीं। कलेक्टर से पार नहीं पड़ी तो संभागीय आयुक्त ने अभियंताओं की बैठक लेकर कहा कि कम से कम सड़कों को दीवाली तक चलने लायक तो बना दो। नवंबर के दूसरे सप्ताह में फिर संभागीय आयुक्त ने बीडीए, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम अधिकारियों को एक तय समय सीमा दी। कहा, 30 नवंबर तक सारी सड़कों का डामरीकरण पूरा हो। अगर नहीं हुआ तो एक्शन लिया जाएगा।
15 दिन पहले तब के हालात देख भास्कर ने दावा किया था कि 30 नवंबर तक डामरीकरण नहीं होगा क्योंकि जिस गति और मंशा से काम चल रहा है, उससे यही लगा और अब वो सच साबित हुआ। तब संभागीय आयुक्त ने दावा किया था कि अगर 30 नवंबर तक डामरीकरण न हुआ तो देख लेना क्या एक्शन होता है। अब 30 नवंबर बीते 8 दिन हो गए, मगर संभागीय आयुक्त का दावा भी बेअसर रहा। न तो किसी इंजीनियर को नोटिस मिला और ना ही डामरीकरण हुआ।
जानिए कौन-कौन सी सड़कें बाकी हैं
डूंगर कॉलेज आर्मी गेट :आर्मी गेट वाली सड़क पर आधा काम हुआ है। गौतम सर्किल–व्यास कॉलोनी तक ही काम हुआ। गौतम सर्किल से संस्कार स्कूल तक WBM का काम बाकी है। यानी सर्दियों में यह काम नहीं होगा। फरवरी में ही काम होगा।
उदासर रोड :उदासर रोड पीडब्ल्यूडी की रोड है। पानी की लाइन बीच में थी। बताते हैं पानी की लाइन दिक्कत कर रही थी। पानी का काम हो गया, लेकिन सर्दियों में यह भी नहीं बनेगी। शहर की सबसे बदसूरत सड़क दीनदयाल सर्किल वाली के बाद उदासर रोड है जहां गाड़ियां झूले की तरह झूलती हैं। इसका डामरीकरण बाकी है।
अशोक नगर रोड :यहां भी डामरीकरण का काम शुरू हुआ है। 30 नवंबर की मियाद यहां भी खत्म हो गई।
खतूरिया कॉलोनी :खतूरिया कॉलोनी में भी डामरीकरण का काम अभी शुरू हुआ। यह भी मियाद पार है।
दीनदयाल – एक साइड बाकी :यह सड़क नासूर बनी हुई है। अभी वेटरनरी विवि साइड वाली लाइन पूरी हुई है जो सिर्फ क्षतिग्रस्त थी। जहां सीवरेज डाली गई, वह साइड पूरी बाकी है। वहां तो अभी WBM भी नहीं हुआ। उसके बाद डामरीकरण होगा। यानी कम से कम 15 दिन और लगेंगे क्योंकि एक साइड की सड़क बनाने में ठेकेदार ने एक महीना पूरा ले लिया।
सोफिया स्कूल के सामने :यह सड़क तो री-टेंडर में ही गई। इसका काम फरवरी के बाद ही शुरू होगा। अब सवाल यह है कि जब इतनी सड़कें बाकी हैं तो क्या गलियों का काम कराकर प्रशासन खुशफहमी पाल रहा है?
पुलिस लाइन चौराहा :यहां CC रोड आधी तो बन गई, मगर ट्रैफिक एक साइड रोड से निकल रहा है। यहां डिवाइडर तोड़ा जा चुका है। कुल मिलाकर यह सड़क भी असली रूप में आने में दो सप्ताह और लेगी।
साहब… मौका तो देखिए…
अधिकारी ज्यादातर कमरों में बैठकर ही सड़क टूटी होने की कल्पना करते हैं। क्योंकि संभागीय आयुक्त, कलेक्टर और ADM सड़कों की पीड़ा इसलिए नहीं समझ पा रहे क्योंकि उनकी गाड़ियों ने उन गड्ढों के झटके सहे ही नहीं। उदासर गांव जाने वाली रोड पर न कलेक्टर गुजरीं न संभागीय आयुक्त।
एक बार उदासर वाली रोड पर जाकर देखें, तब समझ आएगा कि लोग एक साल से कैसे झटके खा रहे हैं। मौका लगे तो दीनदयाल सर्किल और पुलिस लाइन वाली रोड पर जाइए। यह एक-दो फीट नहीं बल्कि 3-3 फीट गहरे गड्ढे हैं। कारों के जंपर टूट रहे हैं।
नेताओं की तरह हो गए अफसरों के दावे
चुनाव में जैसे नेता दावे करते हैं, वैसे ही दावे अब बीकानेर प्रशासन भी कर रहा है। हकीकत अफसर भी जानते हैं, मगर जनता को आश्वासन देने के लिए ऐसी तारीखें फिक्स करते हैं कि अगर कोई बोलना भी चाहे तो ना बोल पाए। समय-सीमा बार-बार टूट रही और फिर नई तारीख तय हो जाती है।
“कुछ तो हो ही रहा है। बाकी हमारा जो काम है, वो हम करेंगे।”
— विश्राम मीणा, संभागीय आयुक्त
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