राज्य के विभिन्न जिलों में दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद दौसा जिले में शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू की है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) ने विभाग में कार्यरत 135 दिव्यांग श्रेणी के कर्मचारियों की सूची प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को भेजकर उनके प्रमाण-पत्रों की मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
135 कर्मचारियों की सूची मेडिकल बोर्ड के पास भेजी
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा के अनुसार, निदेशालय से प्राप्त निर्देशों के आधार पर जिले के सभी दिव्यांग कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसी कड़ी में 135 कर्मचारियों (जिनमें शिक्षक, लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और कार्यालय सहायक शामिल हैं) की सूची जिला अस्पताल को भेजी गई है। इन सभी कर्मचारियों को निर्धारित तिथि पर मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होकर अपनी वास्तविक दिव्यांगता की जांच करानी होगी। यह जांच उन पुराने प्रमाण-पत्रों पर भी लागू होगी, जिनकी अब तक किसी स्तर पर पुनः पुष्टि नहीं की गई थी।
फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी कर्मचारी का दिव्यांगता प्रमाण-पत्र फर्जी, संदिग्ध या नियमानुसार अनुपयुक्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इसमें निलंबन, एफआईआर दर्ज कराना, वेतन व पदोन्नति लाभ की वसूली और आवश्यकता पड़ने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
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मेडिकल बोर्ड करेगा सत्यापन
जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. आरके मीणा ने बताया कि मेडिकल बोर्ड पहले से गठित है और शिक्षा विभाग द्वारा कर्मचारियों को भेजे जाने के अनुसार तिथियां निर्धारित की जाएंगी। बोर्ड प्रत्येक कर्मचारी की दिव्यांगता का प्रतिशत और प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता का परीक्षण करेगा। सूची जारी होने के बाद विभागीय कर्मचारी अपने पुराने दस्तावेज अपडेट कराने में भी जुट गए हैं।
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