गांव राठीवास का मामला, जिला प्रशासन ने समय रहते की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। उपायुक्त अजय कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की टीम ने जिले में बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने के लिए अभियान चलाया हुआ है। इसी क्रम में गांव राठीवास में बाल विवाह होने की सूचना मिलने पर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई की और एक किशोरी को बालिका वधु बनने से बचाया।
गांव में 23 जनवरी को निर्धारित एक विवाह के संदर्भ में मिली गुप्त सूचना के आधार पर जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो लड़की की आयु 17 साल पाई गई। यह पुष्टि होने के बाद इस विवाह को रुकवा दिया गया। विवाह अधिनियम के अनुसार, शादी के लिए लड़की की आयु कम से कम 18 साल होनी आवश्यक है। संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी मधु जैन की संयुक्त विभागीय टीम ने बाल विवाह रुकवाने में सफलता हासिल की।
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बाल विवाह कानूनी अपराध : उपायुक्त
उपायुक्त अजय कुमार ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अन्तर्गत कानूनी अपराध है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है। यदि कम आयु में विवाह किया जाता है तो यह संज्ञेय और गैर जमानती अपराध है, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है, उसको बढ़ावा देता है या उसकी सहायता करता है, तो 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया है कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की व 21 वर्ष से कम आयु के लड़के की बाल विवाह से संबंधित कोई भी सूचना प्राप्त होती है तो वे बाल विवाह निषेध अधिकारी, पुलिस हेल्पलाइन 112, मजिस्ट्रेट या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सूचना दे सकते हैं , ताकि समय पर हस्तक्षेप करके नाबालिग के विवाह को रुकवाया जा सके।
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