कोचिंग सेंटर्स और बड़े शैक्षणिक संस्थानों की तरह सरकारी स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें बताया गया है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करने के लिए शिक्षकों को भी मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाएगी। परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने जारी निर्देशों में बताया है कि एनसीईआरटी की मनोदर्पण से जुड़ी गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ मानसिक वातावरण बनाना जरूरी है। इसके लिए अभिभावकों के साथ भी लगातार संपर्क में रहने को कहा है। बच्चों के मानसिक दबाव को समझने और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए अभिभावकों के लिए भी नियमित रूप से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए खेल, चित्रकला और व्यक्तित्व विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षकों के साथ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कम दो बार मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा और चेतावनी संकेतों की पहचान के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारियों की जिम्मेदारी रहेगी कि वंचित वर्गों, दिव्यांग और मानसिक आघात से जूझ रहे छात्रों के साथ स्कूल में किसी तरह का भेदभाव न हो। प्रत्येक स्कूल में शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए एक आंतरिक समिति होगी। स्कूलों को वर्ष भर की गतिविधियों, कार्रवाई और प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखना होगा। इसकी वार्षिक रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजनी होगी। इसी तरह परीक्षाओं के दौरान निरंतर बच्चों का मनोवैज्ञानिक सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। प्रार्थना सभाओं और अभिभावक-शिक्षक बैठकों में अभिभावकों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी साझा की जाए। काउंसलिंग के कई डिजिटल विकल्प मौजूद विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी मानसिक समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन (844-844-0632) पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक विशेषज्ञों से निशुल्क परामर्श ले सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 2:30 से 4 बजे तक पीएम ई विद्या चैनल और एनसीईआरटी के यू ट्यूब चैनल पर विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर की जाने वाली चर्चा से भी समाधान पा सकते हैं। इसी तरह सोमवार से शुक्रवार शाम 5 से 5:30 बजे तक चलने वाले सहयोग सत्र में तनाव प्रबंधन और पढ़ाई की चुनौतियों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
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