- जीएसटी में इनकम टैक्स क्रेडिट का एक और बड़ा खेल आया सामने
– बिहार के रहने वाले ने दिल्ली में रहकर हरदोई में कराया था फर्म का रजिस्ट्रेशन
– 24 जून 2025 को राज्य कर के उपायुक्त ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी, तीन गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बोगस फर्मों के जरिए 16.42 करोड़ रुपये की आईटीसी (इनकम टैक्स क्रेडिट) हासिल करने के तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सिर्फ कागजों पर ही खरीद और बिक्री दर्शाकर खेल करने के इस मामले में 24 जून को राज्यकर कर के खंड एक के उपायुक्त रविंद्र कुमार ने शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं।
फर्जी अभिलेखों के जरिए बोगस फर्म बनाकर जीएसटी में पंजीकृत कराई गई थीं। इनमें आपस में ही खरीदना और बेचना दर्शाकर 16.42 करोड़ रुपये की आईटीसी हासिल की गई थी। शहर कोतवाली में दर्ज मामले की विवेचना सीओ अंकित मिश्रा की निगरानी में निरीक्षक शिव गोपाल कर रहे थे।
सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि विवेचना के दौरान नई दिल्ली के राजौरी गार्डन थाना क्षेत्र के 7-37 निवासी हिमांशु कुमार, हरीनगर थाना क्षेत्र के ए-11 निवासी निशांत दर्गन और ईस्ट दिल्ली के कल्याणवास थाना क्षेत्र के विनोदनगर इलाके के निवासी योगेंद्र सिंह फतर्याल को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से दो लैपटॉप और तीन मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। प्राथमिकी तो पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी, लेकिन मुख्य कंपनी क्वीक एन बुक निकली। सारी खरीद और बिक्री अंत में इसी फर्म से होती थी। मतलब यह कि इस फर्म ने ही पूरा फर्जीवाड़ा किया था।
इनसेट
कुछ इस तरह किया गया था खेल
अली इंटरप्राइजेज ने एक जनवरी 2024 को हरदोई ने व्यापार करने के लिए जीएसटी में पंजीकरण कराया। इस कंपनी को कपड़ों का कारोबार करने के लिए पंजीकृत किया गया था। विभागीय पोर्टल पर जीएसटी आर-2ए की समीक्षा हुई तो पता चला कि अली इंटर प्राइजेज ने मार्च 2025 में गाजियाबाद में स्थित रिया इंटर प्राइजेज से 66,66,45,224 रुपये की फर्जी आपूर्ति प्राप्त कर ली। इसके बाद 16.42 करोड़ की आईटीसी भी हासिल कर ली। जांच में पता चला कि अली इंटर प्राइजेज ने गाजियाबाद में स्थित और सीजीएसटी में पंजीकृत रिया इंटर प्राइजेज से कोई इनवर्ल्ड सप्लाई प्राप्त ही नहीं की। कोई टैक्स भी जमा नहीं किया। पूरे खेल में तेलंगाना में पंजीकृत सुषमा सेल्स कॉरपोरेशन, दिल्ली में पंजीकृत आरके इंटरप्राइजेज की भी मिलीभगत सामने आई। इसमें आरके इंटरप्राइजेज को 66,16,45,224 रुपये और सुषमा सेल्स कॉरपोरेशन को 22,10,400 रुपये की आउट वर्ल्ड सप्लाई दर्शाई गई है और कुल 16,42,23,323 रुपये की फर्जी आईटीसी हस्तांतरित की गई। यहां तक की जांच राज्य कर विभाग ने की। प्राथमिकी दर्ज होने पर पुलिस ने जांच शुरू की। इसमें पता चला कि एक-दूसरे से खरीद फरोख्त का सिलसिला क्वीक एन बुक फर्म पर आकर रुकता था। बोगस फर्मों को बनाने में भी फर्जी अभिलेखों का इस्तेमाल किया गया था। सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है। कुछ और लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का मतलब
जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का मतलब है कि जब आप अपना तैयार माल या सेवा बेचते हैं, तो उस पर लगने वाले टैक्स में से आप अपनी खरीदारी पर पहले ही चुकाए जा चुके टैक्स को घटा सकते हैं। यह व्यवसायियों को दोहरा कराधान से बचाता है और केवल मूल्यवर्धन पर ही कर देना होता है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट की मुख्य बातें
उदाहरण: मान लीजिए आपने 1000 रुपये का सामान खरीदा और 100 रुपये जीएसटी दिया। फिर आपने इसे आगे 1500 रुपये में बेचा, जिस पर 150 रुपये जीएसटी बना। अब आपको सरकार को 150 नहीं, बल्कि 150-100 = 50 रुपये का शुद्ध टैक्स देना होगा। आप केवल तभी आईटीसी का दावा कर सकते हैं यदि आप जीएसटी में पंजीकृत हैं।
शर्तें: आईटीसी के लिए आपके पास टैक्स इनवॉइस होना चाहिए, माल प्राप्त होना चाहिए, और सप्लायर ने रिटर्न दाखिल किया हो।
गैर-पात्रता: व्यक्तिगत उपयोग, व्यक्तिगत मोटर वाहन, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, और निजी संपत्ति के निर्माण के लिए खरीदे गए सामान व सेवाओं पर आईटीसी नहीं मिलता है। आईटीसी का उद्देश्य व्यवसाय को कच्चे माल या सेवाओं पर पहले से चुकाए गए जीएसटी का रिफंड या समायोजन प्रदान करना है, जिससे व्यापार की लागत कम हो सके।
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