Tamatar kheti : सरगुजा में 50–60 हेक्टेयर में टमाटर की खेती हो रही है, पाउडरी मिल्ड्यू, बैक्टीरियल विल्ट, एफिड और इल्ली से किसान परेशान हैं, विशेषज्ञ संजय यादव ने रोकथाम की सलाह दी है. साथ ही उत्पादन बढ़ाने के सीक्रेट भी साझा किया है.
टमाटर में ठंड में पाउडरी मिल्ड्यू रोग का बढ़ता प्रकोप
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने लोकल 18 को बताया कि ठंड के मौसम में टमाटर की फसल में पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है. इस रोग के लक्षण इस समय खेतों में साफ दिखाई दे रहे हैं, जिसमें पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसा आवरण बन जाता है. उन्होंने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए ब्लू कॉपर यानी कॉपर ऑक्सीक्लोराइड फफूंदनाशी का छिड़काव करने से प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है.
बैक्टीरियल विल्ट से बचाव के लिए शुरुआती उपचार जरूरी
संजय यादव ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में टमाटर की फसल में बैक्टीरियल विल्ट रोग का भी प्रकोप देखा जा रहा है. यह रोग पौधों को अचानक मुरझा देता है, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस रोग से बचाव के लिए प्रारंभिक अवस्था में ही उपचार करना आवश्यक है. रोपाई के समय ट्राइकोडर्मा या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का उपयोग करें. इसके अलावा ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास का ड्रेंचिंग के रूप में प्रयोग करें या गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में डालने से रोग का काफी हद तक नियंत्रण संभव है.
एफिड और फल छेदक इल्ली से किसान परेशान
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक कीट प्रकोप की बात करें तो वर्तमान समय में टमाटर की फसल में एफिड (माहू) और फल छेदक इल्ली का अधिक असर देखने को मिल रहा है. माहू नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा का 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. वहीं फल छेदक इल्ली फल में छेद कर अंदर प्रवेश कर जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इसकी रोकथाम के लिए कोराजन दवा का छिड़काव काफी प्रभावी माना जाता है.
क्षेत्र में 50–60 हेक्टेयर में टमाटर की खेती
कृषि विशेषज्ञ ने जानकारी दी कि वर्तमान में क्षेत्र में लगभग 50 से 60 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई है.कुछ दिन पहले किसानों को टमाटर के अच्छे दाम मिले थे, हालांकि फिलहाल बाजार भाव में थोड़ी गिरावट आई है। इसके बावजूद किसान इस साल मुनाफे में हैं और फसल की स्थिति भी अच्छी बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यदि समय पर रोग और कीटों से बचाव किया जाए, तो किसानों को और बेहतर लाभ मिल सकता है.
स्टेकिंग अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन और मुनाफा
संजय यादव ने बताया कि विभाग द्वारा लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है और किसान भी समय-समय पर सलाह लेने के लिए संपर्क कर रहे हैं. उन्होंने किसानों से अपील की कि टमाटर की खेती लाइन और पंक्ति में करें और स्टेकिंग यानी खूंटी गाड़कर रस्सी से पौधों को सहारा देना जरूर अपनाएं. स्टेकिंग नहीं करने से फल सड़ने और खराब होने की समस्या बढ़ जाती है. स्टेकिंग अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा मिलता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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