Putus Plant: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के जंगलों में विदेशी प्रजाति का पुटूस पौधा तेजी से फैलकर गंभीर खतरा बन गया है. यह बिना किसी उपयोग के खरपतवार की तरह उग रहा है और बीजों के जरिए तेजी से फैलता है. जहां पुटूस फैल जाता है, वहां अन्य पौधों, खासकर कीमती साल के पेड़ों का उगना मुश्किल हो जाता है.
विदेशी पौधा बना देसी जंगलों का दुश्मन
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह पौधा ड्यूरेंटा स्पीशीज का है, जिसे स्थानीय भाषा में पुटुस कहा जाता है. वर्तमान में यह पौधा इतनी तेजी से फैल रहा है कि अब यह पूरी तरह खरपतवार का रूप ले चुका है. खासतौर पर जंगलों और जंगली इलाकों में जहां यह फैल जाता है, वहां अन्य पौधों का उगना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
साल के जंगलों पर सबसे बड़ा खतरा
कृषि एक्सपर्ट ने बताया कि छत्तीसगढ़ में साल का पेड़ सबसे प्रमुख वनस्पति है, जिसे नर्सरी में तैयार कर नहीं लगाया जाता, बल्कि यह गिरे हुए बीजों से प्राकृतिक रूप से उगता है. लेकिन जिन इलाकों में पुटुस फैल चुका है, वहां साल सहित अन्य वनस्पतियों का जर्मिनेशन नहीं हो पाता. पुटुस की जड़ों से निकलने वाली एक तरह की टॉक्सिसिटी आसपास के पौधों को जीवित रहने नहीं देती.
न लकड़ी काम की, न कोई उपयोग
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पुटुस पौधे की कोई व्यावसायिक या पारंपरिक उपयोगिता नहीं है. न इसकी लकड़ी किसी काम की है और न ही यह औषधीय या अन्य किसी रूप में उपयोगी है. उल्टा, यह जंगलों के विस्तार में बाधा बन रहा है और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है.
काटने पर भी नहीं होता खत्म बीज और जड़
कृषि एक्सपर्ट ने बताया कि इस पौधे की सबसे खतरनाक खासियत यह है कि इसका बीज गिरते ही नया पौधा तैयार हो जाता है. इतना ही नहीं, अगर इसे काट भी दिया जाए और जड़ जमीन में रह जाए, तो अगले वर्ष यह फिर से उग आता है. यही वजह है कि इसे खत्म करना बेहद कठिन हो गया है.
विदेशी मूल का पौधा
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पुटुस भारत का मूल पौधा नहीं है. यह किसी माध्यम से विदेश से यहां आया और अब पूरे देश में तेजी से फैल चुका है. मौजूदा हालात को देखते हुए इसे जंगलों के लिए एक तरह का अभिशाप कहा जा सकता है. विशेषज्ञों ने इसे नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई है.
About the Author
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.